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HC News: हाईकोर्ट ने ऑनलाइन म्यूटेशन को दी हरी झंडी, ऑफलाइन पर अड़े आवेदकों को झटका”

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By CourtNews Desk On 10 Sep, 2026
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कोर्ट ने कहा- 1973 के कानून में ऑनलाइन आवेदन का उल्लेख नहीं, लेकिन डिजिटल युग में इसे ऑफलाइन तक सीमित नहीं किया जा सकता; दिक्कत हो तो प्रज्ञा केंद्र, सुविधा केंद्र या विधिक सेवा प्राधिकरण की मदद लें

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने जमीन के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि राजस्व अधिकारी आवेदक से ऑनलाइन म्यूटेशन आवेदन जमा करने पर जोर दे सकते हैं। ऐसा करना बिहार टेनेंट्स होल्डिंग्स (मेंटेनेंस ऑफ रिकॉर्ड्स) एक्ट, 1973 की धारा 11 का उल्लंघन नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून में भले ही ‘ऑनलाइन आवेदन’ शब्द का उल्लेख नहीं है, लेकिन वर्तमान डिजिटल युग में आवेदन की प्रक्रिया को केवल ऑफलाइन यानी भौतिक आवेदन तक सीमित नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने जमशेदपुर निवासी मदन मोहन प्रसाद की ओर से दायर रिट याचिका पर 10 सितंबर को यह आदेश सुनाया। याचिकाकर्ता ने मानगो के वार्ड नंबर 10 स्थित खाता नंबर 427, प्लॉट नंबर 2160, क्षेत्रफल 0.02.40 हेक्टेयर जमीन का म्यूटेशन अपने नाम करने की मांग की थी। सर्किल ऑफिसर ने केवल इस आधार पर ऑफलाइन आवेदन लेने से इनकार कर दिया था कि आवेदन ऑनलाइन जमा नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि कानून की धारा 11 में केवल निर्धारित प्रपत्र में आवेदन देने की बात कही गई है। इसमें ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य करने का कोई प्रावधान नहीं है। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने ऑनलाइन व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि इससे अवैध रसीद जारी करने पर रोक, पारदर्शिता और म्यूटेशन की प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित होती है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि 1973 में जब कानून बनाया गया था, उस समय डिजिटल व्यवस्था की कल्पना भी नहीं थी। आज रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और ऑनलाइन व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने के साथ फाइलों की आवाजाही में होने वाली देरी और भौतिक रिकॉर्ड में हेरफेर की संभावना को कम करती है।

हालांकि कोर्ट ने डिजिटल सुविधा से वंचित लोगों की परेशानी को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाएं समान रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे आवेदक पंचायतों के सुविधा केंद्र, प्रज्ञा केंद्र, मोबाइल ई-सेवा केंद्र या विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरा लीगल वॉलंटियर की मदद ले सकते हैं।

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कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए मदन मोहन प्रसाद को तत्काल ऑनलाइन आवेदन करने का निर्देश दिया। किसी प्रकार की परेशानी होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से सहायता लेने को कहा गया। ऑनलाइन आवेदन दाखिल होने के बाद संबंधित अधिकारी को उस पर निर्णय लेकर आवेदक को सूचित करना होगा।

फैसले के प्रमुख बिंदु

  • म्यूटेशन आवेदन को केवल ऑफलाइन प्रक्रिया तक सीमित नहीं किया जा सकता।
  • राजस्व अधिकारी ऑनलाइन आवेदन पर जोर दे सकते हैं।
  • ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था को धारा 11 के विपरीत नहीं माना गया।
  • डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता और रिकॉर्ड की सुरक्षा बढ़ती है।
  • डिजिटल सुविधा नहीं होने पर सुविधा केंद्र/प्रज्ञा केंद्र से मदद ली जा सकती है।
  • जरूरत पड़ने पर डीएलएसए और पैरा लीगल वॉलंटियर सहायता करेंगे।
  • आवेदक का ऑनलाइन फॉर्म जमा होने के बाद अधिकारी को निर्णय लेकर सूचित करना होगा।
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