Ranchi News: माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने आयोग से तीखे सवाल करते हुए पूछा कि जब कंप्यूटर हैकिंग या बाहरी हस्तक्षेप की आशंका थी, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उच्च स्तरीय जांच क्यों नहीं कराई गई। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
मामला अर्चना कुमारी एवं अन्य की याचिका से जुड़ा है, जिसमें 23 अप्रैल 2026 को जारी JSSC के उस नोटिस को चुनौती दी गई है। इस नोटिस में 2819 अभ्यर्थियों को 8 मई 2026 को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत को बताया कि बिना दोषी अभ्यर्थियों की पहचान किए सभी 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना अवैध है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उनका कहना था कि प्रार्थी किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों के उपयोग में शामिल नहीं रहे हैं, फिर भी उन्हें दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है।
वहीं आयोग की ओर से बताया गया कि परीक्षा कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन मोड में आयोजित की गई थी और हैकिंग या बाहरी हस्तक्षेप का पता लगाने के लिए विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। लगभग 25 हजार अभ्यर्थियों में से 2819 के सिस्टम में संदिग्ध गतिविधि के संकेत मिलने पर उनकी आंसर-की लॉक कर दी गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने आयोग के जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि यदि गड़बड़ी की आशंका थी, तो दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी। आयोग ने बाद में अदालत से उच्च स्तरीय जांच की अनुमति देने का अनुरोध किया।