गंभीरता: चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने किया रिपोर्ट का अवलोकन, अब 9 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
कानूनी पेंच: बीएनएसएस की नई धाराओं के तहत मजिस्ट्रेट ने की है जांच, झालसा की टीम ने जेल जाकर दर्ज किए थे बयान
- बाबूलाल मरांडी ने उठाया था मुद्दा: नेता प्रतिपक्ष द्वारा मामला उठाए जाने और मीडिया में खबरें आने के बाद शुरू हुई थी हाई लेवल जांच।
- कई स्तरों पर जांच: रांची जिला प्रशासन, जेल आईजी और विधिक सेवा प्राधिकरण ने अलग-अलग गठित की थी टीम।
Ranchi News: रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार जेल) में एक महिला बंदी के गर्भवती होने और उसके साथ जेल परिसर में कथित यौन शोषण व प्रताड़ना के आरोपों से जुड़े संवेदनशील मामले में मंगलवार को झारखंड हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पीड़िता की मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और रांची के न्यायायुक्त (जुडिशियल कमिश्नर) द्वारा कराई गई न्यायिक जांच की रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने दोनों सीलबंद रिपोर्टों का गहराई से अवलोकन किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई की तिथि 9 जुलाई निर्धारित की है।
नए कानून के तहत हुई न्यायिक जांच
इससे पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया था कि रांची के जुडिशियल कमिश्नर ने 19 मई को न्यायिक दंडाधिकारी-11 (JMFC) को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 196(2)(बी) के तहत इस पूरे मामले की न्यायिक जांच करने का जिम्मा सौंपा था। कोर्ट को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देनी थी, जिसे अब हाई कोर्ट के समक्ष रख दिया गया है।
झालसा की टीम ने की थी त्वरित पहल: इस मामले में झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) ने भी एक विशेष जांच टीम गठित की थी। इस टीम ने होटवार जेल का दौरा कर पीड़िता, जेल के पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) और जेल के मुख्य चिकित्सक के विस्तृत बयान दर्ज किए थे, जिसे बाद में झालसा को सौंपा गया था।