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HC News: केवल समन की तकनीकी खामी के आधार पर एकपक्षीय (एक्स-पार्टी) डिक्री रद्द नहीं हो सकती: झारखंड हाईकोर्ट

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By CourtNews Desk On 18 Jun, 2026
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HC News: केवल समन की तकनीकी खामी के आधार पर एकपक्षीय (एक्स-पार्टी) डिक्री रद्द नहीं हो सकती: झारखंड हाईकोर्ट
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Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने दीवानी मामलों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किया है। अदालत ने अपने एक आदेश में कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को चल रहे मुकदमे की पूरी जानकारी थी और उसके पास अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर था, तो वह केवल समन तामीली (समन मिलने) में किसी तकनीकी खामी का बहाना बनाकर एकपक्षीय (एक्स-पार्टी) डिक्री को रद्द नहीं करवा सकता। जस्टिस एसके द्विवेदी की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में कोर्ट को यह देखना आवश्यक है कि संबंधित पक्ष की मंशा वास्तव में सुनवाई में शामिल होने की थी या नहीं।

मामले की पृष्ठभूमि:

यह पूरा विवाद रांची के मौजा दतमा स्थित 10 डिसमिल जमीन से जुड़ा हुआ है। इस मामले में निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने वादी के पक्ष में एकपक्षीय डिक्री पारित कर दी थी। इसके बाद प्रतिवादियों ने हाईकोर्ट में द्वितीय अपील दायर कर दावा किया कि उन्हें समन सही तरीके से तामील नहीं कराया गया था और उन्हें इस डिक्री की जानकारी बहुत बाद में हुई, इसलिए इस डिक्री को रद्द किया जाना चाहिए।

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हाईकोर्ट की टिप्पणी और फैसला:

  • रिकॉर्ड का अवलोकन: हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड को देखने के बाद पाया कि निचली अदालतें पहले ही यह निष्कर्ष दे चुकी हैं कि प्रतिवादियों को मुकदमे की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर समय पर कोर्ट में अपना पक्ष नहीं रखा।
  • सीपीसी का हवाला: अदालत ने दीवानी प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 9 नियम 13 का जिक्र करते हुए कहा कि एकपक्षीय डिक्री रद्द कराने के लिए प्रतिवादी को यह साबित करना होगा कि उसके पास अदालत में न आने का कोई “उचित और ठोस कारण” था। सिर्फ तकनीकी आपत्तियां उठाना काफी नहीं है।
  • अपील खारिज: कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि द्वितीय अपील (Second Appeal) तभी स्वीकार की जा सकती है जब उसमें कानून का कोई सारवान प्रश्न (Substantial Question of Law) शामिल हो। चूंकि इस मामले में ऐसा कोई गंभीर कानूनी प्रश्न नहीं था, इसलिए अदालत ने प्रतिवादियों की अपील को खारिज कर दी।
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