Ranchi: सिविल कोर्ट रांची के पोक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने कोलकाता निवासी डायटिशियन समापिका दास को नाबालिग की लापरवाही से हुई मृत्यु के मामले में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। यह घटना 21 नवंबर 2019 को रांची के कांके रोड स्थित गांधी नगर कॉलोनी में हुई थी। बताया गया कि 16 वर्षीय नाबालिग लड़की समापिका दास के आवास पर अकेली थी, जब दास ताला लगाकर बाहर चली गई थीं। उसी दौरान माचिस की तीली से आग लगने के कारण लड़की 85 फीसदी जल गई थी। अस्पताल में उसने दिए गए बयान में कहा था कि माचिस से खेलते समय यह हादसा हुआ।
शुरुआत में गोंदा थाना में यूडी केस दर्ज हुआ था, लेकिन बाद में मामला संदिग्ध प्रतीत होने पर विस्तृत जांच की गई। जांच में सामने आया कि मृतका मौसमी को पढ़ाई और बेहतर जीवन के नाम पर लाया गया था, लेकिन उससे घरेलू काम करवाया जा रहा था। पुलिस का मानना था कि अगर उसके पास दूसरी चाबी होती, तो वह समय रहते बाहर निकल सकती थी। मामले में पुलिस ने किशोर न्याय अधिनियम, बाल श्रम निषेध कानून व बंधुआ मजदूरी अधिनियम के तहत आरोप लगाए थे। ट्रायल के दौरान अभियोजन ने 8 गवाह पेश किए, लेकिन समापिका दास के विरुद्ध आरोप साबित नहीं हो सके। अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें दोषमुक्त करार दिया।

