- अदालत ने लगाया 50 हजार रुपये का जुर्माना, त्वरित ट्रायल चलाकर विशेष न्यायाधीश बीके श्रीवास्तव की कोर्ट ने सुनाया फैसला
- 6 मई 2025 से लगातार जेल में बंद था अभियुक्त, पीड़िता और मां की गवाही ने कोर्ट में तय किया गुनाह
Ranchi News: राजधानी रांची के डोरंडा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए यौन उत्पीड़न के बहुचर्चित मामले में पोक्सो (POCSO) एक्ट के विशेष न्यायाधीश बीके श्रीवास्तव की अदालत ने शनिवार (4 जुलाई) को अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत ने दोषी अभियुक्त सुशील एक्का को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की कठोर सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इससे पूर्व, शुक्रवार को अदालत ने उसे इस जघन्य अपराध का दोषी करार दिया था और सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 4 जुलाई की तारीख मुकर्रर की थी।
घर में अकेली पाकर किया था यौन उत्पीड़न
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, अभियुक्त सुशील एक्का पर आरोप था कि उसने नाबालिग बच्ची को उसके घर में अकेली पाकर उसके साथ यौन उत्पीड़न जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था। इस घटना को लेकर पीड़िता के परिजनों द्वारा रांची के डोरंडा थाने में नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया था और वह 6 मई 2025 से लगातार जेल में बंद रहकर ही इस मामले का ट्रायल फेस कर रहा था।
स्पीडी ट्रायल में पीड़िता और मां की गवाही रही बेहद अहम
अदालत ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित ट्रायल (स्पीडी ट्रायल) चलाया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता और उसकी मां सहित अन्य गवाहों को अदालत के समक्ष पेश किया गया। कोर्ट में गवाही देते हुए पीड़िता और उसकी मां ने घटना का पूरी तरह से समर्थन किया और अभियुक्त की पहचान की। गवाहों के अचूक बयानों और पुख्ता वैज्ञानिक व दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुशील एक्का को पोक्सो एक्ट और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा से दंडित किया।