Ranchi News: रिश्वत मांगने के मामले में आरोपी दारोगा मनोज कुमार ने 11 जून एसीबी रांची की विशेष अदालत में सरेंडर किया। सरेंडर करने के साथ उसने निजी मुचलका भरा। झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत ने पिछले दिनों मनोज कुमार को अग्रिम जमानत की सुविधा प्रदान की थी। साथ ही निर्देश दिया था कि चार सप्ताह के भीतर निचली अदालत में सरेंडर करते हुए निजी मुचलका और बेल बॉंड भरना है। अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह महाराणा ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर मनोज कुमार ने 10 हजार रुपए निजी मुचलका और दो जमानतदारों के नाम के साथ बेल बॉंड भरा।
मामला एसीबी रांची थाना कांड संख्या 08/2025 से जुड़ा है। आरोप है कि डुमरी थाना कांड संख्या 08/2025 के अनुसंधानकर्ता मनोज कुमार ने मामले को कमजोर करने के लिए आरोपी राजू साहू से दो लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी। बाद में कथित तौर पर यह राशि एक लाख रुपये पर तय हुई। शिकायत मिलने पर एसीबी ने सत्यापन कराया और आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद ट्रैप की तैयारी की, लेकिन आरोपी अधिकारी के मौके पर मौजूद नहीं रहने के कारण ट्रैप सफल नहीं हो सका।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि शिकायतकर्ता स्वयं उस आपराधिक मामले का आरोपी है जिसकी जांच मनोज कुमार कर रहे थे। ऐसे में जांच पर दबाव बनाने के उद्देश्य से झूठा आरोप लगाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वहीं एसीबी की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि रिश्वत लेने का प्रयास भी अपराध की श्रेणी में आता है।
हाई कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि सत्यापन तो हुआ, लेकिन ट्रैप सफल नहीं हो सका। ऐसे में अभियोजन के पास फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप और सत्यापन रिपोर्ट ही उपलब्ध है। अदालत ने यह भी कहा कि मामले की प्रकृति “दो धार वाली तलवार” जैसी है, जिसमें शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों पक्षों के पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है। ट्रैप की कार्रवाई पूरी नहीं होने से मामला अभी निर्णायक स्थिति में नहीं है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने मनोज कुमार को चार सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश देते हुए 10 हजार रुपये के मुचलके और दो जमानतदारों पर अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।