पीड़ित समेत सभी प्रमुख गवाह मुकरे, पुलिस की तफ्तीश में मिलीं कई गंभीर कमियां
Ranchi News: डोरंडा थाना क्षेत्र के हिनू स्थित शिवपुरी चौक के पास भेलपूरी विक्रेता से मोबाइल और पैसे छीनने तथा चाकू से जानलेवा हमला करने के मामले में अपर न्यायायुक्त (A.J.C.-XII) पवन कुमार की अदालत ने आरोपी सूर्या लोहरा और विकास कच्छप उर्फ टकला को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
क्या था मामला? डोरंडा थाना कांड संख्या 270/2024 के अनुसार, 3-4 नवंबर 2024 की रात हिनू के शिवपुरी कॉलोनी निवासी श्याम किशोर कुमार काली पूजा मेले से भेलपूरी बेचकर घर लौट रहा था। आरोप था कि शिवपुरी चौक के पास दो युवकों ने उसे रोककर मोबाइल और ₹4,000 छीन लिए तथा विरोध करने पर सिर पर चाकू से वार कर दिया था। इस संबंध में पीड़ित के भाई नंद किशोर यादव के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
कोर्ट में क्यों कमजोर पड़ा मामला? सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रीतांशु कुमार सिंह ने मजबूत तर्क रखे, जिससे पुलिस की थ्योरी पूरी तरह धराशायी हो गई:
गवाहों का मुकरना: मामले में कुल 5 गवाहों की गवाही कराई गई। पीड़ित श्याम किशोर कुमार (P.W.-2), उसके चाचा दिनेश यादव (P.W.-3) और प्रत्यक्षदर्शी राकेश कुमार राय (P.W.-4) अदालत में मुकर गए (Hostile) और उन्होंने आरोपियों को पहचानने से साफ इनकार कर दिया।
सूचक की अनभिज्ञता: सूचक नंद किशोर यादव (P.W.-1) ने जिरह में स्वीकार किया कि घटना के समय वह मौके पर मौजूद नहीं था और उसे नहीं मालूम कि उसके भाई पर हमला किसने किया था। उसने आरोपी सूर्या लोहरा को पड़ोसी होने के कारण पहचानने की बात कही और कहा कि वह घटना में शामिल नहीं था।
आईओ की जांच में गंभीर खामियां: जांच अधिकारी (I.O.) मो. आजाद अंसारी (P.W.-5) की गवाही के दौरान यह बात सामने आई कि पुलिस ने आरोपियों की शिनाख्त परेड (TIP) नहीं कराई थी। जब्ती सूची (Seizure List) पर किसी भी आरोपी के हस्ताक्षर नहीं थे और न ही पुलिस मालखाने (M.R. Number) का कोई ब्योरा था। इसके अलावा जब्त मोबाइल के मालिकाना हक का कोई दस्तावेज भी पेश नहीं किया गया।
अदालत का फैसला मामले की सुनवाई और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास है और प्रत्यक्ष साक्ष्य का पूरी तरह अभाव है। इस आधार पर अदालत ने सूर्या लोहरा और विकास कच्छप को बीएनएस (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत बरी कर दिया। सूर्या लोहरा पहले से जमानत पर था, जबकि न्यायिक हिरासत में बंद विकास कच्छप को तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया गया।

