Ranchi News: राजधानी में मवेशियों की तस्करी से जुड़े एक मामले में पुलिस की कमजोर पैरवी एक बार फिर सामने आई है। करीब पांच साल तक चले इस केस में अदालत ने पांच आरोपियों को तस्करी के बजाय सिर्फ पशु क्रूरता का दोषी पाया और प्रत्येक पर महज 50-50 रुपए का जुर्माना लगाया। अपर न्यायायुक्त ओंकार नाथ चौधरी की अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह साबित नहीं हो सका कि मवेशियों को वध के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। हालांकि, अदालत ने माना कि मवेशियों को अमानवीय और क्रूर तरीके से ठूंसकर ले जाया जा रहा था, जो पशु क्रूरता अधिनियम के तहत अपराध है। अदालत ने हसन नट, रिंकू, सद्दाम हुसैन, सोनू नट और चांद नट को दोषी करार देते हुए 50-50 रुपए का जुर्माना लगाया। साथ ही यह भी आदेश दिया कि जुर्माना नहीं देने पर 15 दिन की साधारण कैद होगी।
क्या है मामला
यह मामला 15 दिसंबर 2020 का है, जब पिठोरिया थाना पुलिस ने वाहन जांच के दौरान एक कंटेनर को पकड़ा था। तलाशी के दौरान उसमें 52 मवेशियों को बेहद खराब हालत में ठूंसकर ले जाया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने झारखंड बोवाइन स्लॉटर एक्ट की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी समेत पांच पुलिस गवाहों के बयान दर्ज किए गए, लेकिन अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि मवेशियों को वध के लिए ले जाया जा रहा था। इसी आधार पर अदालत ने तस्करी के आरोप से बरी करते हुए केवल क्रूरता के मामले में सजा सुनाई।

