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विधायक खरीद-फरोख्त मामलाः HC में PIL दाखिल, कांग्रेसी विधायक अनूप सिंह के कॉल डिटेल की जांच की मांग

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 27 Jul, 2021
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Ranchi: हेमंत सरकार (Hemant Government) को गिराने की साजिश का मामला अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। पंकज कुमार यादव की ओर से दाखिल याचिका में इस मामले की जांच सीबीआई (CBI), इनकम टैक्स (Income Tax) और ईडी (ED) से कराने की मांग की गई है। याचिका में कांग्रेसी विधायक जयमंगल उर्फ अनूप सिंह के मोबाइल कॉल की जांच की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2005 से ही राज्य में विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला चल रहा है, जो अभी भी जारी है। याचिका में वर्ष 2005, 2006, 2010, 2012, 2016 और 2018 राज्यसभा चुनाव के लिए विधायकों की खरीद का मामला सामने आया था।

याचिका में कांग्रेसी विधायक जयमंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह के कॉल डिटेल की जांच की मांग की गई, ताकि पता लगाया जा सके कि उन्हें इस बारे में कैसे पता चला कि विधायकों की खरीद-फरोख्त होने वाली है। यह भी पता चलेगा कि विदेश जाने पर उन्होंने किससे मुलाकात की।

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विधायकों की खरीद-फरोख्त से एक वोटर ठगा महसूस कर रहा है। क्योंकि वह अपने क्षेत्र के विकास के लिए विधायक का चुनाव करता है, लेकिन वे लोग इस तरह से बिक जाते हैं। जो कि वोटर के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

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याचिका में पिछले पांच माह में दिल्ली जाने वाले सभी विधायकों की जांच करने की मांग की गई है। यह भी कहा गया है कि इस बात का भी पता लगाया जाए कि दिल्ली जाने वाले विधायक किन-किन लोगों से मिले हैं। इसके साथ ही इनकी संपत्ति की भी जांच की जाए।

याचिका में यह भी कहा गया है कि कई विधायकों पर राज्यसभा में खरीद-फरोख्त मामले में चार्जशीट दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि विधायक उमाशंकर अकेला पर वर्ष 2010 के मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।

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याचिका में मांग की गई है कि इस मामले में किंगपिन पर राजद्रोह और सरकार को अस्थिर करने का मुकदमा दर्ज होनी चाहिए। इसके अलावा विपक्ष के आरोप में अगर सच्चाई है कि यह प्रकरण में सत्ता पक्ष प्रोपेगेंडा है, तो इसका भी पर्दाफाश होना चाहिए।

इस तरह के प्रोपेगेंडा का नेतृत्व करने वाले लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि झारखंड के जनप्रतिनिधि यहां की जनता के वोट को अपने निजी फायदे और पद पाने के लिए नहीं बेच सके। इस मामले में महाराष्ट्र सहित दिल्ली का नाम सामने आ रहा है। इसलिए केंद्रीय एजेंसियां ही इसकी जांच करे।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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