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अनचाही बच्ची को मां ने ठुकराया, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मासूम को मिला नया घर

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 19 Jun, 2021
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New Delhi: महाराष्ट्र के चाइल्ड केयर में रह रही ढाई साल की बच्ची को आखिरकार उसका घर मिल ही गया। यह बच्ची अपने जन्म के पांच महीने के बाद ही चाइल्ड केयर होम में रहने को मजबूर थी। इस मामले से जुड़ी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस बच्ची को गोद लेने वाले पेरेंट्स को इसकी अंतरिम कस्टडी लेने का आदेश सुनाया।

अदालत ने इस मामले में बाल न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम से लेकर पैदा होने वाली त्रासद स्थिति और न्यायिक प्रणाली की स्थिति का भी जिक्र किया। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच ने कहा कि आम तौर पर, एक बच्चा प्राकृतिक घटनाओं (जब माता-पिता दोनों की मृत्यु हो जाती है) से अनाथ हो जाता है। लेकिन इस मामले में, बच्ची अदालत के आदेश से अनाथ हो गई।

कोर्ट ने बच्ची को गोद लेने पेरेंट्स कृपाल अमरीक सिंह और उनकी पत्नी बलविंदर कौर को अंतरिम कस्टडी देकर बच्चे को मुंबई के चाइल्डकेअर से घर लेना जाने की अनुमति दी। बच्ची को जन्म देने वाली मां भी इस फैसले के हक में थी। बच्ची की मां ने इसके जन्म की दो वजह बताई थी। इसमें उसके नौकरी देने वाले के रेप के अलावा अपने एक दोस्त के साथ संबंध की बात कही गई थी।

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लड़की का जन्म 8 जनवरी, 2019 को हुआ था। आठ दिन बाद, एक एनजीओ ‘चाइल्डलाइन’ ने महाराष्ट्र सरकार के तहत बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सूचित किया कि मां बच्ची की देखभाल नहीं कर रही है। एनजीओ ने यह भी बताया कि उसकी मां बच्ची को किसी को गोद देने या किसी आश्रम में रखने के लिए तैयार थी। एनजीओ ने आशंका जताई कि मां बच्ची को बेच सकती है।

सीडब्ल्यूसी ने मां को हर महीने एक बार बच्चे के साथ उसके सामने पेश होने का निर्देश दिया। लेकिन 22 जनवरी, 2019 को, मां ने कृपाल अमरीक सिंह और उनकी पत्नी के पक्ष में एक नोटरीकृत एडॉप्शन डीड के माध्यम से अपने बच्चे को गोद लेने की सहमति दे दी। वे लोग बच्ची को पंजाब ले गए।

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जब एनजीओ को पता चला कि बच्चे को 40,000 रुपये में बेचा गया है तो उसने सीडब्ल्यूसी को सूचित किया। इसके बाद कृपाल अमरीक सिंह और बच्ची की मां के खिलाफ 18 जून, 2019 को केस दर्ज हो गया। सीडब्ल्यूसी ने बालिका को एक वात्सल्य ट्रस्ट को सौंपने का निर्देश दिया।

अमरीक सिंह का परिवार पिछले डेढ़ साल से बच्ची की कस्टडी के लिए बार-बार सीडब्ल्यूसी और बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा रहा है। लेकिन हाईकोर्ट इस बात पर अड़ा रहा कि इन परिस्थितियों में सीडब्ल्यूसी ने सही काम किया। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अमरीक सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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