Delhi/Ranchi: सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को पूछताछ करने या जांच में सहयोग के लिए वाट्सएप (Whatsapp), ई-मेल या किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नोटिस देना मान्य नहीं होगा।
यह आदेश उन मामलों में लागू होगा जिन आरोपों में सात साल या उससे कम की सजा का प्रावधान है। यानी बीएनएसएस की धारा 35(3) में. ऐसे मामलों में आरोपी को भौतिक रुप से नोटिस देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई के मामले में 16 जनवरी 2025 को ही दिया था। लेकिन कुछ राज्यों की पुलिस इसे अमल में नहीं ला रही थी. पुलिस के अधिकारी वाट्सएप पर नोटिस भेज देती थी।
दो दिन पहले इससे जुड़ा एक मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों की पुलिस को एक आदेश जारी कर कहा है कि वह इसे लागू करे। ताकि इस प्रक्रिया की वजह से किसी को परेशानी का सामना न करना पड़े।
Whatsaap पर नोटिस भेजती है पुलिस
जानकारी के मुताबिक बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत पुलिस किसी भी आरोपी को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए थाना बुलाती है। आरोपी को अनुसंधान में पुलिस का सहयोग करने को कहा जाता है।
इनमें ऐसे आरोप शामिल हैं, जिसमें सात साल या उससे कम की की सजा का प्रावधान है। ऐसे कई मामले आये, जिनमें पुलिस ने वाट्सएप पर नोटिस भेज दिया और फिर आरोपी पर यह आरोप लगा कि उसने नोटिस का तामिला नहीं किया।

