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CBI COurt News: 16 साल पुराने अलकतरा घोटाले में क्लासिक कोल के निदेशक दिलीप सिंह को 3 साल की जेल, JE सुरेश शर्मा बरी

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 04 Jul, 2026
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  • सीबीआई की विशेष अदालत का बड़ा फैसला, दोषी निदेशक पर एक लाख का जुर्माना, राशि न देने पर 4 माह की अतिरिक्त कैद
  • 607 मीट्रिक टन बिटुमेन के नाम पर 47 फर्जी चालानों से उड़ाए थे 2.08 करोड़ रुपये, ट्रायल के दौरान दो आरोपियों की हो चुकी है मौत
  • कागजों पर बह गया 2.08 करोड़ का अलकतरा, 16 साल बाद क्लासिक कोल के निदेशक को 3 साल की कठोर कैद

Ranchi News: झारखंड के बहुचर्चित अलकतरा (बिटुमेन) घोटाला मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश (प्रथम) योगेश कुमार की अदालत ने क्लासिक कोल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दिलीप कुमार सिंह को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास (कठोर कैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना राशि नहीं देने पर उन्हें चार महीने की अतिरिक्त साधारण जेल काटनी होगी। वहीं, दूसरी ओर इसी मामले में ट्रायल का सामना कर रहे तत्कालीन जूनियर इंजीनियर (JE) सुरेश शर्मा को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में ससम्मान बरी कर दिया।

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क्या था पूरा घोटाला?

यह मामला वर्ष 2010 का है, जो चक्रधरपुर-खरसावां सड़क निर्माण परियोजना से जुड़े पथ निर्माण विभाग (रोड कंस्ट्रक्शन डिवीजन), जमशेदपुर से संबंधित था।

  • फर्जीवाड़ा: आरोप था कि बिना अलकतरा मंगाए ही, महज कागजों पर 607.39 मीट्रिक टन बिटुमेन (अलकतरा) की खरीद दिखा दी गई। इसके लिए 47 फर्जी चालान तैयार किए गए और सरकारी खजाने से 2.08 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी कर ली गई।
  • ऐसे खुली पोल: विभाग के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता विनोद कुमार ने इस भारी वित्तीय अनियमितता का खुलासा किया था और इसकी आधिकारिक सूचना सीबीआई (CBI) को दी थी।

16 साल के कानूनी सफर की मुख्य कड़ियां:

  • प्राथमिकी और चार्जशीट: प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद सीबीआई ने 16 फरवरी 2010 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद 22 अप्रैल 2011 को सीबीआई ने निदेशक दिलीप कुमार सिंह, प्रबंध निदेशक पवन कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता अनिल कुमार वर्मा और जूनियर इंजीनियर सुरेश शर्मा के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।
  • आरोप तय: अदालत ने 5 अप्रैल 2018 को सभी आरोपियों के खिलाफ विधिवत आरोप तय कर ट्रायल शुरू किया था।
  • दो की मौत: लंबी कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के दौरान ही दो मुख्य आरोपियों— प्रबंध निदेशक पवन कुमार सिंह और तत्कालीन सहायक अभियंता अनिल कुमार वर्मा की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके खिलाफ अदालती कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया था।
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कोर्ट में सीबीआई की प्रभावी पैरवी

शनिवार को हुई अंतिम सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से महिला लोक अभियोजक (Public Prosecutor) खुशबू जायसवाल ने अदालत के समक्ष बेहद प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। उन्होंने गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को प्रस्तुत करते हुए आरोपियों के खिलाफ जोरदार बहस की। सीबीआई की दलीलों को स्वीकार करते हुए अदालत ने क्लासिक कोल के निदेशक दिलीप कुमार सिंह को भ्रष्टाचार का दोषी पाते हुए जेल भेज दिया, जबकि ठोस सबूतों के अभाव में जूनियर इंजीनियर सुरेश शर्मा को दोषमुक्त कर दिया।

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