Ranchi News: राजधानी रांची स्थित रिम्स से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को सामान्य कचरे में मिलाने से संबंधित खबरों पर झारखंड हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लिए गए मामले तथा सरकारी-निजी अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के नियमानुसार निष्पादन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। यह याचिका ह्यूमन राइट कॉन्फ्रेंस संस्था द्वारा दाखिल की गई है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस महेश शरद चंद्र सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई। अदालत के पूर्व आदेश के आलोक में रिम्स प्रबंधन की ओर से शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल किया गया। रिम्स ने बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट के विधिवत निष्पादन के लिए चयनित कंपनी ने 1 फरवरी से कार्य प्रारंभ कर दिया है और अदालत द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का पालन कर लिया गया है।
सुनवाई के दौरान दिलीप कुमार पाठक ने हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कुछ कंपनियां केवल कागजों पर बायो मेडिकल वेस्ट का निष्पादन दिखा रही हैं। पाठक ने आरोप लगाया कि पाकुड़ जिले की ग्रीनलैंड वेस्ट डिस्पोज कंपनी द्वारा हजारीबाग और बोकारो जिलों से मेडिकल वेस्ट उठाने का एग्रीमेंट नियमों के विपरीत है, क्योंकि नियमों के अनुसार 75 किलोमीटर के दायरे में ही वेस्ट निष्पादन किया जा सकता है, जबकि यह दूरी ढाई सौ किलोमीटर से अधिक है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रार्थी को विस्तृत नोट तैयार कर पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को निर्धारित की गई है।