Ranchi News: सिविल कोर्ट रांची के ज्यूडिशियल कमिश्नर अनिल कुमार मिश्रा नंबर-1 की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक अहम मामले में ट्रायल कोर्ट के बरी आदेश को पलटते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने शिकायतकर्ता पुष्पा सोनी की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए समंता प्रिसीजन वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक आकाश समंता, प्रकाश समंता और बीना समंता को दोषी करार दिया है। यह मामला वर्ष 2018 के चेक बाउंस से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने सोने के आभूषण बनाने के लिए शिकायतकर्ता से 3.10 लाख रुपये लिए थे और बाद में देनदारी के बदले 3.40 लाख रुपये का पोस्ट डेटेड चेक दिया था। चेक 9 मई 2018 को एक्सिस बैंक में प्रस्तुत किया गया, लेकिन अपर्याप्त राशि के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया, जिस पर परिवाद दायर किया गया था।
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत ने 3 अक्टूबर 2024 को तकनीकी आधार पर आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ शिकायतकर्ता ने अपील दायर की। अपील की सुनवाई के बाद ज्यूडिशियल कमिश्नर की अदालत ने माना कि चेक कंपनी के खाते से जारी हुआ था, जिस पर निदेशक के हस्ताक्षर थे और वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया था। कंपनी को अलग से आरोपी न बनाए जाने को अदालत ने घातक त्रुटि नहीं माना। अदालत ने तीनों आरोपियों को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही शिकायतकर्ता को 4 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया। मुआवजा नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने आरोपियों को 15 दिनों के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।