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Jharkhand News/H Court: फर्जी रिव्यू याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों पर एक लाख का जुर्माना

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 23 Dec, 2025
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Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि सरकार और उसके अधिकारी न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने के लिए निराधार और दुर्भावनापूर्ण याचिकाएं दाखिल कर रहे हैं। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर सिविल रिव्यू (पुनर्विचार) याचिका को फर्जी और निराधार करार देते हुए खारिज कर दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे उन्हें अपनी जेब से भरना होगा।मामला आरके कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 25 अगस्त 2025 को पारित पूर्व आदेश में मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। उस आदेश में केवल सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी निर्देशों के अनुपालन में निचली अदालत को निर्धारित समय-सीमा के भीतर फैसला करने को कहा गया था। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा पुनर्विचार याचिका दाखिल करना अदालत के अनुसार केवल निष्पादन कार्यवाही को रोकने की मंशा को दर्शाता है।

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खंडपीठ ने राज्य सरकार को “बलशाली वादी” और संबंधित कंपनी को “कमजोर पक्ष” बताते हुए कहा कि राज्य का दायित्व है कि वह ईमानदार और वैध दावों का सम्मान करे, न कि तकनीकी हथकंडों के जरिए नागरिकों और संस्थानों को अनावश्यक रूप से परेशान करे। अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह की अनावश्यक मुकदमेबाजी से सार्वजनिक धन की खुली बर्बादी हो रही है, जिसकी जिम्मेदारी अधिकारियों पर तय होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने भविष्य के लिए सख्त चेतावनी भी दी है। अदालत ने निर्देश दिया कि अब राज्य सरकार की ओर से दायर की जाने वाली अपील, पुनरीक्षण या संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत याचिकाएं तभी स्वीकार की जाएंगी, जब उनके साथ झारखंड राज्य मुकदमा नीति के पालन का प्रमाण पत्र संलग्न होगा। कोर्ट ने सिविल रिव्यू याचिका खारिज करते हुए जुर्माने की राशि चार सप्ताह के भीतर झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) में जमा करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को निर्धारित की गई है।

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