Ranchi:हजारीबाग जिले में 450 एकड़ वन भूमि को रैयती बताकर अवैध रूप से बेचने के मामले में सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान एवं जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत के आदेश के आलोक में शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दायर किया, लेकिन अदालत ने उस पर असंतोष जताया। कोर्ट ने पूछा कि “बिना नक्शे के जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई?” इस पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा सका। केवल यह बताया गया कि सभी प्रखंडों में सर्किल ऑफिसर की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि एक सितंबर तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कोर्ट ने कहा कि शनिवार और रविवार का भी उपयोग करते हुए जांच पूरी की जाए। अंचलाधिकारियों की अध्यक्षता में बनी जांच कमेटियां डीसी को रिपोर्ट सौंपेंगी। डीसी, सभी प्रखंडों की रिपोर्टों को संकलित कर वन विभाग के सचिव को भेजेंगे। वन विभाग के सचिव यह रिपोर्ट अदालत में पेश करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है। यह याचिका शिवशंकर शर्मा की ओर से दाखिल की गई है।
दो वर्षों में बदल गए आंकड़े
कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में पाया कि वर्ष 2023 और 2025 में राज्य सरकार द्वारा दायर शपथ पत्रों में अलग-अलग आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं, जो गंभीर सवाल खड़े करते हैं। पूर्व में अदालत ने वन विभाग के प्रधान सचिव को नए सिरे से जांच कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश भी दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हजारीबाग में हजारों लोगों ने रैयती घोषित कर वन भूमि की खरीद-बिक्री की है। इस प्रक्रिया में वन विभाग ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी जारी किए, जबकि यह भूमि वन क्षेत्र में आती है। आरोप है कि इस काम में वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत है। पूर्व की जांच में केवल तीन तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मियों पर प्रपत्र गठित किए गए, लेकिन किसी वरिष्ठ अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

