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Waste Management: गढ़वा में बन रहे डंपिंग यार्ड के निर्माण पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

Ranchi: Waste Management झारखंड हाईकोर्ट ने गढ़वा में ठोस कचरा प्रबंधन के तहत बन रहे डंपिंग यार्ड के निर्माण पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। रामलाल भुइयां की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने रोक लगाते हुए सरकार को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिका में कहा गया है कि डंपिंग यार्ड के निर्माण में उचित स्थल का चयन नहीं किया गया है और निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण( सिया) के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। निर्माण कार्य में काफी अनियमितता भी बरती जा रही है। अदालत से डंपिंग यार्ड का निर्माण नियमों के तहत और सभी मानकों के अनुसार करने का आग्रह किया गया है।

पूर्व में सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। लेकिन सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की। इस पर अदालत ने गढ़वा में कचरा के लिए डंपिंग यार्ड के निर्माण कार्य पर अगले आदेश तक रोक लगाते हुए सरकार को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

इसे भी पढ़ेंः MNREGA SCAM: हाईकोर्ट ने ईडी और एसीबी से जेई राम बिनोद सिन्हा के बयान की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में मांगी

गढ़वा- मझियांव- कांडी सड़क निर्माण के लिए काटे गए पेड़ों का मांगा हिसाब
झारखंड हाईकोर्ट ने गढ़वा- मझियांव- कांडी सड़क के निर्माण के दौरान काटे गए पेड़ों का हिसाब सरकार से मांगा है। सरकार को यह बताने को कहा गया है कि सड़क निर्माण के लिए कितने पेड़ काटे गए हैं और तूफान में कितने पेड़ गिरे हैं। सरकार को शपथपत्र के माध्यम से पूरा ब्योरा देने का निर्देश अदालत ने दिया है। अगली सुनवाई पूजावकाश के बाद होगी।

इसको लेकर बृजेंद्र कुमार पाठक ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि सड़क निर्माण के नाम पर अंधाधुंढ पेड़ों की कटाई की जा रही है। जहां जरूरत नहीं है वहां भी पेड़ काटे जा रहे हैं। सरकार की ओर से बताया गया कि पेड़ जरूरत के अनुसार ही काटे जा रहे हैं। जिन पेड़ों को चिन्हित किया गया है उसकी ही कटाई की जा रही है।

सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से इसका विरोध किया गया और अदालत में तस्वीर पेश कर बताया गया कि इसके लिए पेड़ों की कटाई की गई है। इस पर अदालत ने सरकार को यह बताने को कहा कि कितने पेड़ काटे गए हैं और कितने तूफान में गिरे हैं। पूजावकाश के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।

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