Ranchi: एनआईए मामलों के विशेष न्यायाधीश-सह-एजेस्टीसी-XVI, रांची की अदालत ने गुरुवार , 16 अक्टूबर 2025 को माओवादी संगठन से जुड़े अभियुक्त नागेश्वर गंझू उर्फ तरुण जी उर्फ धीरेन्द्र भोक्ता (A-8) की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह जमानत याचिका एनआईए विशेष मामला संख्या 08/2018 से संबंधित थी।
यह मामला मूल रूप से 23 नवंबर 2017 को पांकी थाना कांड संख्या 157/2017 के रूप में दर्ज हुआ था, जिसे बाद में एनआईए ने RC-23/2018/NIA/DLI के रूप में पुनः दर्ज कर जांच शुरू की। अभियुक्त के खिलाफ आईपीसी की धारा 386, 120बी, आर्म्स एक्ट की धाराएं 25(1B)a, 26, 35, CLA अधिनियम की धारा 17 और 18 तथा यूएपीए (UAPA) की धाराएं 10, 11, 17, 18, 19 और 20 के तहत मामला दर्ज है। वह 13 मई 2021 से न्यायिक हिरासत में है।
अभियुक्त पक्ष का तर्क था कि नागेश्वर गंजू निर्दोष है और झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति के तहत 7 मई 2021 को उसने आत्मसमर्पण किया था। उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है, केवल सह-अभियुक्त के बयान पर कार्रवाई की गई है। साथ ही, कुछ सह-अभियुक्तों को पहले ही उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।
वहीं एनआईए ने विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्त प्रतिबंधित संगठन टीपीसी (TPC) का सक्रिय सशस्त्र कैडर था, जो क्षेत्रीय कमांडर के रूप में कार्य करता था। वह ठेकेदारों से जबरन लेवी वसूलता था और उस धन का इस्तेमाल हथियार खरीदने और आतंकी गतिविधियों में करता था। जांच में कई गवाहों के बयान व दस्तावेजी साक्ष्य से इस बात की पुष्टि हुई है।
न्यायालय ने केस रिकॉर्ड और चार्जशीट की समीक्षा के बाद माना कि अभियुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं। अदालत ने कहा कि यूएपीए की धारा 43D(5) में ऐसे मामलों में जमानत देने पर सख्त प्रतिबंध है, इसलिए केवल लंबी कारावास अवधि के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी बताया कि 131 गवाहों में से अब तक 52 की गवाही पूरी हो चुकी है। अंततः न्यायालय ने नागेश्वर गंजू की जमानत याचिका को पुनः खारिज कर दिया।