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POCSO court News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी बुर्जुग मोहम्मद मुस्तफा अंसारी को 10 साल की सजा, 25 हजार जुर्माना

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 28 Sep, 2026
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Ranchi News: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में रांची की विशेष पॉक्सो अदालत ने 6 साल पुराने मामले में दोषी करार अभियुक्त मोहम्मद मुस्तफा अंसारी को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि पीड़िता के चिकित्सा खर्च और पुनर्वास के लिए देने का निर्देश दिया गया है। एजेसी-4 सह विशेष पॉक्सो जज बिरेंद्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने 23 सितंबर को आरोपी को दोषी करार दिया था। अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376(2)(n) और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 व 8 के तहत दोषी माना। हालांकि, अपहरण के आरोप में लगायी गयी धारा 366 के आवश्यक तत्व पर्याप्त रूप से साबित नहीं होने पर आरोपी को इस आरोप से बरी कर दिया गया।

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डीएनए जांच बनी अहम कड़ी

अदालत ने अपने फैसले में एसएफएसएल की रिपोर्ट को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। जांच में पीड़िता के कपड़े से लिए गये प्लाजो के नमूने में वीर्य पाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक उस नमूने के पुरुष डीएनए प्रोफाइल का मिलान आरोपी के रक्त के नमूने से हुआ। अदालत ने कहा कि फोरेंसिक साक्ष्य आरोपी और पीड़िता के कपड़े पर मिले वीर्य के बीच जैविक संबंध स्थापित करता है।

मेडिकल रिपोर्ट में भी यौन हिंसा से इनकार नहीं

पीड़िता की 3 जून 2020 को मेडिकल जांच हुई थी। रिपोर्ट में बाहरी शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले थे, लेकिन पेल्विक जांच में लैबिया में सूजन और फोरशेट के हिस्से में छोटा घाव पाया गया था। मेडिकल बोर्ड ने कहा था कि यौन हमला होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चोट का नहीं मिलना यौन हिंसा नहीं होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

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पीड़िता के बयान को अदालत ने माना विश्वसनीय

अदालत ने कहा कि पीड़िता ने पुलिस, मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 के बयान और अदालत में आरोपी द्वारा उसके साथ गलत हरकत किए जाने की बात कही। अदालत के अनुसार, जिरह के दौरान भी उसने घटना से संबंधित परिस्थितियों को स्पष्ट किया और उसका बयान मेडिकल तथा फोरेंसिक साक्ष्य से पुष्ट होता है।

 

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