Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 के रिजल्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिव्यांग कोटे के 5 सीटों को सुरक्षित रखने का निर्देश देते हुए इन पदों पर नियुक्ति नहीं करने का निर्देश दिया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने शुक्रवार को राहुल वर्धन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने राज्य सरकार और जेपीएससी को दस सप्ताह में जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। अदालत प्रथम द्रष्टया माना है कि आरक्षण की अनदेखी हुई है।
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड लोक सेवा आयोग के ने 342 पद के लिए नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। सभी 342 पद का रिजल्ट भी जारी कर दिया गया है। जारी रिजल्ट में सिर्फ 8 दिव्यांगों की ही नियुक्ति की सिफारिश की गयी है। नियमों के अनुसार चार प्रतिशत आरक्षण के अनुरूप दिव्यांगों के लिए 13 पद होना चाहिए। सिर्फ आठ पद पर नियुक्ति करना उचित नहीं है । प्रार्थी ने आरोप लगाया कि दिव्यागों के शेष पांच पदों पर दूसरे उम्मीदवारों का चयन किया गया है जो गलत है। प्रार्थी ने बताया कि उसने पीटी,मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू दिया है। दिव्यांग कोटा के तहत उसका चयन न कर गैर दिव्यांग का चयन किया जाना नियम का अवेहलना है ।
जेपीएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने 342 पद के लिए परिणाम घोषित कर सरकार को भेज दिया है। राहुल वर्धन ने जो याचिका दायर की है उसमें जो चयनित उम्मीदवार हैं उन्हें प्रतिवादी नहीं बनाया गया है। उन्हें प्रतिवादी बनाना चाहिए था। उन्हें कितने अंक प्राप्त हुए हैं इसकी जानकारी याचिका में नहीं दी है। वह किस कैटेगरी के दिव्यांग हैं यह भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह बता पाना मुश्किल है कि इनका चयन क्यों नहीं हुआ। रिकॉर्ड देखने के बाद ही यह पता चल सकता है कि इनका चयन क्यों नहीं किया गया है

