Ranchi: रांची नगर निगम और आरआरडीए द्वारा भवन नक्शा स्वीकृत करने में देरी और अनियमित वसूली के आरोपों पर दर्ज स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने रांची नगर निगम द्वारा दाखिल विस्तृत जवाब पर संतोष व्यक्त करते हुए याचिका को निष्पादित कर दिया।सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से शपथपत्र दाखिल कर अदालत को बताया गया कि 3 जुलाई 2023 से अब तक ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल मैनेजमेंट सिस्टम (BPAMS) के माध्यम से कुल 2529 आवेदन भवन नक्शा स्वीकृति के लिए प्राप्त हुए। इनमें से 2068 आवेदन स्वीकृत कर दिए गए हैं, जबकि 461 आवेदन तकनीकी या दस्तावेजी कमियों के कारण लंबित हैं। निगम ने कहा कि इन लंबित आवेदनों पर भी आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है।
निगम ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार पूरी तरह ऑनलाइन संचालित है और किसी भी आवेदन को 30 दिनों से अधिक लंबित नहीं रखा जाता। पारदर्शिता और समय-सीमा सुनिश्चित करने के लिए विभागीय निगरानी भी बढ़ाई गई है। नगर निगम के इन तथ्यों को रिकॉर्ड में लेते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि प्रस्तुत स्थिति संतोषजनक है। इसके बाद अदालत ने इस स्वतः संज्ञान जनहित याचिका को निष्पादित कर दिया।