Ranchi: रांची के बड़ा तालाब सहित अन्य डैमों और जल स्रोतों को अतिक्रमण और प्रदूषण मुक्त करने के मामले पर झारखंड हाईकोर्ट में अब 6 नवंबर को विस्तृत सुनवाई होगी। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान, सरकार की ओर से इस मामले में विस्तृत पक्ष रखने के लिए हाईकोर्ट से समय देने का आग्रह किया गया। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने आंशिक सुनवाई के बाद सरकार के आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 6 नवंबर निर्धारित कर दी।
झालसा को मिली थी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी
जल स्रोतों के प्रदूषण और अतिक्रमण पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 29 अगस्त को झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) को इन जल स्रोतों की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी थी। कोर्ट के निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं होने के कारण यह जिम्मेदारी झालसा को दी गई थी। अदालत ने झालसा के सदस्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में जिला प्रशासन, नगर निगम, जल संसाधन विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं। हाईकोर्ट ने कमेटी को समय-समय पर जल स्रोतों का निरीक्षण कर कोर्ट को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। निरीक्षण में पारा लीगल वालंटियर्स और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की मदद लेने को भी कहा गया था।
झालसा ने इस निर्देश के तहत रांची के सभी जलाशयों और डैमों का निरीक्षण किया है और सभी हितधारकों के साथ बैठकें की हैं। 18 सितंबर और 7 अक्टूबर को हुई बैठकों में रांची जिले के जलाशयों, नदियों और जल निकायों पर हुए अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन किया गया तथा विभिन्न विभागों की ओर से तैयार की गई कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। अब इस पूरी कार्रवाई और कार्ययोजना पर सरकार 6 नवंबर को अपना पक्ष रखेगी।

