एकल पीठ का आदेश बरकरार
Ranchi: रिम्स में वर्ष 2020 में हुई लैब टेक्नीशियन नियुक्ति को लेकर विवाद एक बार फिर हाईकोर्ट में गूंजा। चयनित अभ्यर्थी संतोष कुमार सिंह समेत अन्य चार की ओर से दायर अपील याचिका पर मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट की युगल पीठ में सुनवाई हुई। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। युगल पीठ ने स्पष्ट किया कि परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी और नियमों की अनदेखी हुई थी। इसलिए वर्ष 2020 का जारी रिजल्ट रद्द रहेगा। अदालत ने रिम्स प्रशासन को निर्देश दिया कि तीन माह के भीतर भारत सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुरूप नया परिणाम प्रकाशित किया जाए। साथ ही, जो लैब टेक्नीशियन पूर्व से कार्यरत हैं, उन्हें तब तक काम करने दिया जाएगा। यदि तीन माह में रिजल्ट जारी नहीं हो पाता है और सेवा विस्तार की आवश्यकता होती है तो इसके लिए कोर्ट से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता समीर सौरभ और विशाल सिंह ने बताया कि नियुक्ति विज्ञापन और केंद्र सरकार के नियमों का उल्लंघन हुआ है।
क्लास 3 और 4 की नियुक्ति में केवल स्किल टेस्ट क्वालीफाइंग होना चाहिए, लेकिन रिम्स ने इसे मेरिट लिस्ट में जोड़ दिया। मालूम हो कि आवेदक भुवन भाष्कर ने परीक्षा परिणाम में हेराफेरी को लेकर याचिका दायर की थी। जांच में यह बात सामने आई कि रिजल्ट निकालते समय रिटन टेस्ट, एक्सपीरियंस और स्किल टेस्ट के अंक जोड़कर मेरिट बनाई गई, जबकि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार केवल स्किल टेस्ट क्वालीफाइंग होना चाहिए था और इसमें दिए गए अंक मेरिट में नहीं जोड़े जा सकते। अधिवक्ता समीर सौरभ और विशाल सिन्हा ने अदालत को बताया कि स्किल टेस्ट के अंक मनमाने ढंग से बढ़ाए-घटाए गए ताकि कुछ अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया जा सके। अदालत ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए रिजल्ट को निरस्त किया और नए सिरे से निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाने का आदेश दिया।

