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Law University: संविधान में महिला-पुरुष में भेदभाव नहीं तो समाज में क्यों, सोच बदलने की जरूरत

Ranchi: Law University नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च लॉ (NUSRL) रांची, झालसा, सीएचआरएसएस और पटना विश्वविद्यालय की ओर से महिलाओं के धार्मिक अधिकार और मानवाधिकार पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय अध्ययन गोष्ठी का समापन हो गया।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमें अपने सोच की पुनर्निर्माण करने की जरूरत है। हमारे संविधान में लिखे हुए अनुच्छेद में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया गया है, तो फिर हम सब अपने समाज में ऐसा क्यों करते हैं। उन्होंने संविधान सभा में शामिल सभी 15 महिलाओं को संविधान की मां का दर्जा दिया।

झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन ने कहा कि नई और पुरानी सोच में अंतर होने से वर्तमान समय में टकराव हो रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज को अपनी कुरीतियों को परंपरा के नाम पर निभाना छोड़ कर धर्म के मूल्यों की ओर बढ़ना होगा।

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उन्होंने शपथ ली कि हम समाज में महिलाओं के अधिकार की रक्षा करेंगे। उन्होंने कवि दिनकर पंक्तियां सुनाते हुए कहा कि नारी वह महासेतु है, जो जीवन को पृथ्वी पर लाती है। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों की ओर से नाटक के मंचन और कविता पाठ से हुई। इसके बाद डॉ राकेश सिन्हा ने धर्म अध्यात्म पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि भाषा संस्कृति की पहचान है।

उन्होंने अध्यात्म और धर्म के बीच का अंतर समझाते हुए कहा कि हमारा समाज प्रगतिशील तब ही कहलाएगा जब धर्म समय के अनुसार बदलेगा। भाषा की सभ्यता और भारत के आध्यात्मिक बहुलवाद पर उन्होंने आजादी के पहले और बाद के दौर में महिलाओं स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा ने भारतीय सीता-राम परंपरा में नारी के आदि काल से पुरुष के बराबर होने पर अपना विचार साझा किया। इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के लिए 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का ऐलान भी किया।

डा. सुनीता राय ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों को संकुचित सोच ने रोका है, किसी धर्म ने नहीं। उन्होंने महिलाओं अधिकारों पर व्यापक जागरूकता लाने की जरूरत बताई। मौके तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ रवि रंजन, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत, डॉ राकेश सिन्हा, मनन कुमार मिश्रा सहित अन्य मौजूद थे।

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