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Lakhimpur Kheri Violence : यूपी पुलिस पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, कहा- जांच रिपोर्ट का रात एक बजे तक किया इंतजार

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 21 Oct, 2021
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New Delhi: Lakhimpur Kheri Violence लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिर से उत्तर प्रदेश पुलिस की धीमी जांच और मंशा पर सवाल उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को अभियुक्तों की गिरफ्तारी, अभियुक्तों की पुलिस और न्यायिक हिरासत की स्थिति तथा गवाहों व पीडि़तों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवालों में घेरते हुए कहा कि हमें लगता है कि आप देरी करने के लिए धीमी गति अख्तियार किए हैं। कृपया इस धारणा को दूर करें।

इस मामले में प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि जांच अंतहीन कहानी नहीं बननी चाहिए। अदालत ने प्रदेश सरकार द्वारा अंतिम क्षणों में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने पर भी सवाल उठाया और मामले की सुनवाई 26 अक्टूबर तक टालते हुए अगली बार एडवांस में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि सील बंद लिफाफे में स्थिति रिपोर्ट दाखिल की गई है। प्रधान न्यायाधीश ने देर से स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि अंतिम क्षणों में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का क्या मतलब है? हम इसे कैसे पढ़ेंगे? स्थिति रिपोर्ट पहले दाखिल करनी चाहिए थी।

जस्टिस रमना ने कहा कि उन्होंने रात एक बजे तक इंतजार किया कि कुछ दाखिल होगा लेकिन कुछ भी दाखिल नहीं हुआ। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में क्यों दाखिल की। कोर्ट ने तो ऐसा नहीं कहा था। कोर्ट के स्थिति रिपोर्ट नहीं देख पाने पर साल्वे ने कहा कि सुनवाई शुक्रवार तक टाल दी जाए लेकिन पीठ ने सुनवाई टालने से मना कर दिया और सुनवाई जारी रखी।

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कोर्ट ने स्थिति रिपोर्ट देखने के बाद साल्वे से कहा कि रिपोर्ट में 44 गवाहों के बयान दर्ज करने की बात है जिसमें से चार के बयान सीआरपीसी की धारा 164 (मजिस्ट्रेट के समक्ष) में दर्ज हुए हैं। कोर्ट ने सवाल किया कि सिर्फ चार के बयान 164 में क्यों दर्ज हुए और लोगों के बयान 164 में क्यों नहीं हुए। साल्वे ने कहा कि प्रक्रिया जारी है।

पहले कोर्ट का मानना था कि पुलिस अभियुक्तों के प्रति नरम रवैया अपना रही है लेकिन अब सभी अभियुक्त गिरफ्तार हो चुके हैं और सभी जेल में हैं। साल्वे ने कहा कि इसमें दो मामले हैं। एक किसानों को गाड़ी से रौंदने का है और दूसरा तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या का है जिसमें जांच थोड़ी मुश्किल है क्योंकि भीड़ से अभियुक्तों की शिनाख्त करानी है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दोनों मामलों को अलग कर देंगे। यहां सिर्फ किसानों को गाड़ी से रौंदने पर सुनवाई हो रही है। पीठ ने पूछा कि इस मामले में कितने अभियुक्त गिरफ्तार हुए हैं और कितने पुलिस हिरासत व कितने न्यायिक हिरासत में हैं।

साल्वे ने कहा कि कुल 10 अभियुक्त गिरफ्तार हुए हैं जिनमें से चार पुलिस हिरासत में हैं बाकी न्यायिक हिरासत में। जस्टिस सूर्यकांत ने सवाल किया कि जो लोग न्यायिक हिरासत में हैं उनके लिए पुलिस हिरासत मांगी गई थी या नहीं। क्योंकि ऐसा भी होता है कि पुलिस हिरासत मांगी ही नहीं गई हो और कोर्ट ने सीधे अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया हो। क्या स्थिति है।

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वकील गरिमा प्रसाद ने कहा कि अभियुक्तों से तीन दिन तक पुलिस हिरासत में पूछताछ हुई थी, उसके बाद न्यायिक हिरासत में भेजे गए। साल्वे ने कहा कि उनके बयान दर्ज हो चुके हैं, घटना के वीडियो थे जो जांच के लिए भेजे गए इसलिए आगे पूछताछ की जरूरत नहीं रही। इस पर पीठ ने कहा कि जांच अंतहीन कहानी नहीं बननी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों की सुरक्षा का आदेश देते हुए कहा कि एसआइटी को उन गवाहों की पहचान करनी चाहिए जो खतरे में हैं। साल्वे ने कहा कि कोर्ट जिन मुद्दों पर चिंता जता रहा है, उन्हें वह समझ रहे हैं। कोर्ट एक सप्ताह के लिए सुनवाई टाल दे, वह ताजा स्थिति बताएंगे। कोर्ट ने इस अनुरोध पर सुनवाई 26 अक्टूबर तक के लिए टाल दी।

बता दें कि लखीमपुर खीरी में गत तीन अक्टूबर को गाड़ी से रौंदने और हिंसा में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट वकील शिव कुमार त्रिपाठी द्वारा इस घटना के बारे में भेजे गए पत्र पर संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। इस मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र भी आरोपी है। आशीष सहित कुल 10 अभियुक्त फिलहाल हिरासत में हैं।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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