डालसा सचिव ने प्रेमाश्रय, बालाश्रय व सहयोग विलेज का किया निरीक्षण, बच्चों की काउंसिलिंग
डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा भी टीम में रहे शामिल
Ranchi News: “बड़ा होकर भीख मांगना चाहता हूं, मम्मी-पापा को खिलाना है… भीख मांगना अच्छा लगता है।” यह शब्द उस रेस्क्यू बच्चे के हैं, जिसने काउंसिलिंग के दौरान अपने भविष्य का सपना बताया। यह दृश्य Thursday को प्रेमाश्रय, बालाश्रय और सहयोग विलेज आश्रय गृह के निरीक्षण के दौरान सामने आया। न्यायमूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष, झालसा सुजीत नारायण प्रसाद के निर्देश पर तथा सदस्य सचिव झालसा कुमारी रंजना अस्थाना और न्यायायुक्त रांची अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में डालसा सचिव श्री राकेश रौशन ने 22 जनवरी 2026 को आश्रय गृहों का निरीक्षण किया। इस दौरान रेस्क्यू किए गए बच्चों से मुलाकात कर उनकी काउंसिलिंग भी की गई। निरीक्षण के क्रम में डालसा सचिव सबसे पहले प्रेमाश्रय पहुंचे, जहां 13 रेस्क्यू बच्चों से बातचीत की गई। बच्चों ने बताया कि उन्हें खाने-पीने या रहने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन वे अपने माता-पिता के पास घर जाना चाहते हैं और यहां उनका मन नहीं लग रहा है।
इसके बाद डालसा टीम सहयोग विलेज आश्रय गृह पहुंची, जहां रेस्क्यू किए गए तीन बच्चों से मुलाकात की गई। काउंसिलिंग के दौरान जब बच्चों से पूछा गया कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं, तो बच्चों का जवाब सभी को भावुक कर गया। बच्चों ने कहा कि वे बड़े होकर भीख मांगना चाहते हैं ताकि अपने मम्मी-पापा को खिला सकें। इसके पश्चात डालसा सचिव अपनी पूरी टीम के साथ बालाश्रय पहुंचे और वहां रेस्क्यू किए गए 21 बच्चों से मुलाकात कर काउंसिलिंग की। इस दौरान बच्चों को दिए जा रहे भोजन, शिक्षा और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली गई। डालसा सचिव ने आश्रय गृह के सुपरिटेंडेंट-इन-चार्ज को निर्देश दिया कि जब तक बच्चे यहां रहेंगे, तब तक उनकी उचित शिक्षा और नियमित काउंसिलिंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। निरीक्षण टीम में डिप्टी एलएडीसी श्री राजेश कुमार सिन्हा, पीएलवी साहिष्ता प्रवीण, संगीता देवी, पिंकू कुमारी, बरखा तिर्की शामिल रहे।

