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Jharkhand News/CBI: फैसला: दोस्ताना ऋण वापसी मांगने पर बैंक मैनेजर को मित्र ने फंसाया झूठे केस में, कोर्ट ने किया केस बंद

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 24 Nov, 2025
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ठोस सबूत नहीं, बैंक मैनेजर के खिलाफ मुकदमा चलाने की नहीं मिली अनुमति
जेल में काटे 162 दिन
Ranchi: रिश्वत मामले में फंसे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के टेल्को टाउन शाखा(जमशेदपुर) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक मुकेश कुमार को अदालत से बड़ी राहत मिली है। सिविल कोर्ट रांची के सीबीआई के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने उनके खिलाफ चल रहे रिश्वत प्रकरण में आगे की कार्यवाही समाप्त कर दी है। मामले में जांच अधिकारी सह सीबीआई के डीएसपी ने जब मुकदमा चलाने की अनुमति सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सक्षम प्राधिकारी से मांगी तो उन्होंने 31 जनवरी 2024 को अभियोजन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जिसे बाद में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने भी बैंक के निर्णय से सहमति जताई। कहा जाए तो बैंक मैनेजर को दो साल बाद राहत मिली।

मामला कांड संख्या आरसी 10/2023 से जुड़ा है। सीबीआई ने 8 सितंबर 2023 को शिकायत मिलने के बाद ट्रैप की कार्रवाई की और मुकेश कुमार को रंगे हाथ 10 हजार रुपए लेते गिरफ्तार किया था। उसी दिन उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। जहां वह 162 तक दिन जेल में रहे। इसके बाद उन्हें हाईकोर्ट से 16 फरवरी 2024 को जमानत मिली थी। जांच पूरी होने पर सीबीआई ने 6 नवंबर 2023 को रिश्वत मामले में चार्जशीट किया। लेकिन उसमें अभियोजन स्वीकृति आदेश नहीं था। यह पहला केस है जब रिश्वत मामले को ट्रायल होने से पूर्व ही बंद कर दिया गया।

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ठोस सबूत नहीं मिला:
अदालत ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी ने सभी साक्ष्यों, शिकायत, ऑडियो ट्रांसक्रिप्शन, गवाहों के बयान और लेनदेन की जांच पर विचार कर पाया कि रिश्वत की मांग और स्वीकार करने का कोई ठोस सबूत नहीं है। अदालत ने माना कि बिना अभियोजन स्वीकृति के मुकदमा चलाना संभव नहीं है। इसको देखते हुए मामला बंद कर दिया गया। शिकायतकर्ता अरुण कुमार सिंह से बैंक मैनेजर ने₹10 हजार रिश्वत मांगी थी। आरोप था कि यह रकम शिकायतकर्ता के वेतन खाते से लगी रोक हटाने के लिए मांगी गई थी।


दोस्ताना ऋण वापसी मांगने पर फंसाया:
अदालत में बैंक मैनेजर ने कहा कि उन्होंने किसी से रिश्वत नहीं मांगी, बल्कि शिकायतकर्ता को पहले फ्रेंडली लोन दिया था। यह राशि शिकायतकर्ता के एक सहकर्मी के खाते में 28 फरवरी 2022 को ट्रांसफर की गई थी, जो बाद में वापस की जानी थी। जब उन्होंने अपने पैसे की वापसी मांगी, तो शिकायतकर्ता ने रिश्वत का झूठा आरोप लगाकर सीबीआई में शिकायत कर दी। जांच के दौरान मुकेश कुमार के पास से कोई रिश्वत की राशि बरामद नहीं हुई थी।

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