Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के वकीलों के लिए स्वास्थ्य बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने यह आदेश विदेश कुमार धान द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
क्या कहा याचिका में?
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने ट्रस्टी कमेटी के अंतर्गत केवल 15,000 वकीलों के लिए ही स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने का निर्णय लिया है, जबकि झारखंड राज्य में कुल लगभग 33,000 अधिवक्ता पंजीकृत हैं।
“सभी अधिवक्ताओं को समान रूप से स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलना चाहिए, न कि केवल कुछ को। यह मौलिक अधिकार और समानता के सिद्धांत के विपरीत है,” — याचिकाकर्ता ने तर्क दिया।
परिवार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की माँग
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने यह भी आग्रह किया कि:
- वकीलों के परिवारों को भी स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल किया जाए।
- राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से अधिवक्ताओं को जोड़ा जाए।
- वकीलों के लिए अलग से कल्याणकारी योजनाएं शुरू की जाएं, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत हो सके।
कोर्ट का रुख
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह:
- दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करे।
- यह स्पष्ट करे कि अब तक वकीलों को कौन-कौन सी सुविधाएं दी जा रही हैं और भविष्य में किन योजनाओं को लागू करने की योजना है।
महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि
झारखंड में अधिवक्ताओं की बड़ी संख्या छोटे शहरों और जिलों में कार्यरत है, जहाँ सरकारी सहायता, स्वास्थ्य सुविधा, पेंशन, बीमा जैसी सुविधाएं लगभग नगण्य हैं। कई राज्यों में अधिवक्ताओं को सरकार की ओर से विशेष कल्याणकारी पैकेज, बीमा और पेंशन योजनाएं दी जाती हैं, जिसे आधार बनाकर झारखंड हाईकोर्ट में यह याचिका दाखिल की गई।