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High Court News: खतियान पर देर से चुनौती स्वीकार नहीं, हाईकोर्ट ने निचली अदालत का आदेश किया रद्द

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 24 Mar, 2026
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Ranchi News: Jharkhand High Court ने दुमका के भूमि विवाद से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि खतियान (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) के अंतिम प्रकाशन के बाद निर्धारित समय सीमा बीत जाने पर उसे चुनौती नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति S.K. Dwivedi की अदालत ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए वाद को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि Santhal Pargana Settlement Regulation, 1872 के प्रावधानों के अनुसार, खतियान के प्रकाशन के छह महीने के भीतर ही आपत्ति दर्ज की जा सकती है। इसके बाद वह अंतिम रूप ले लेता है और बिना नई बंदोबस्ती या राज्य सरकार की अनुमति के उसे चुनौती देना कानूनन मान्य नहीं है। मामला दुमका जिले के बारा करैला और गजांदा गांव की जमीन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता केदार बैद की माता के नाम पर वर्ष 1998 में खतियान प्रकाशित हुआ था। इसके बावजूद प्रतिवादी लोबिन मांझी एवं अन्य ने वर्ष 2006 में जमीन पर अधिकार और कब्जा को लेकर वाद दायर किया।

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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रतिवादियों ने न तो तय छह महीने की अवधि में आपत्ति की और न ही समय पर खतियान को चुनौती दी। ऐसे में वर्ष 2006 में दायर मुकदमा समय-सीमा से बाहर है और इसे कानूनन स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि दुमका की निचली अदालत द्वारा वाद खारिज करने से इनकार करना उचित नहीं था। इसलिए 12 मई 2010 के उस आदेश को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली और संबंधित टाइटल सूट को खारिज कर दिया।

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