अदालत की दोटूक— ‘सुप्रीम कोर्ट से SLP खारिज होने के बाद मस्टर रोल का बहाना नहीं चलेगा, 25 जून को खुद हाजिर हों अधिकारी’
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारियों की कार्यशैली पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता समीना खातून के दिवंगत पति के बकाया वेतन का भुगतान आगामी 24 जून तक हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित तिथि तक 9 सितंबर 1997 से 31 मार्च 2000 की अवधि का पूरा बकाया वेतन 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ नहीं दिया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है। ऐसी स्थिति में लोहरदगा के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), माध्यमिक शिक्षा निदेशक, तथा स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को 25 जून को व्यक्तिगत रूप से अदालत में सशरीर उपस्थित होना होगा। साथ ही उन्हें यह भी जवाब देना होगा कि आदेश की अनदेखी करने के लिए उनका खुद का वेतन क्यों न रोक दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद मस्टर रोल का नया बहाना
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता के पति के उक्त अवधि (1997-2000) के मस्टर रोल पर हस्ताक्षर उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उन्हें इस अवधि का वेतन नहीं दिया जा सकता। इस दलील पर खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने कहा कि सरकार यह नया बहाना इस स्तर पर नहीं बना सकती, क्योंकि यह तर्क न तो पहले एकलपीठ (Single Bench) के सामने रखा गया, न डिवीजन बेंच के सामने और न ही देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के समक्ष उठाया गया था।
जीवनभर न्याय को तरसा कर्मी, अब विधवा को भी सता रही सरकार: कोर्ट
अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार का यह रवैया प्रथम दृष्टया जानबूझकर अदालत की अवमानना (Wilful Disobedience) करने जैसा है। कोर्ट ने भावुक और कड़े शब्दों में कहा:
“पहले याचिकाकर्ता के पति को उनके पूरे जीवनकाल में न्याय का लाभ नहीं मिल सका और अब उनकी मृत्यु के बाद उनकी विधवा को भी उनके वैध आर्थिक अधिकार और भुगतान से वंचित रखने का प्रयास किया जा रहा है।”
क्या है पूरा मामला?
- फरवरी 2025: हाईकोर्ट की खंडपीठ ने समीना खातून के पति को 9 सितंबर 1997 से 29 जुलाई 2011 तक की अवधि का बकाया वेतन 7% ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था।
- 23 सितंबर 2025: राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी (SLP दायर की), जिसे शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया।
- 24 सितंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट से आदेश बहाल रहने के बावजूद सरकार ने पालन नहीं किया। हाईकोर्ट ने दोबारा आदेश दिया, लेकिन न तो पूरा भुगतान हुआ और न अधिकारी उपस्थित हुए।
- इसके बाद पीड़ित विधवा समीना खातून ने न्याय के लिए हाईकोर्ट में अवमानना याचिका (Contempt Petition) दाखिल की।
खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया तीनों संबंधित आला अधिकारियों को अवमानना का दोषी मानते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 जून 2026 को मुकर्रर की है, जिससे शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है।