स्कूल फीसः दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का आदेश ठीक से पढ़ें, तो विवाद हो जाएगा समाप्त

दिल्ली के निजी स्कूलों (Private School Fee) को एनुअल फीस और डेवलपमेंट फीस वसूलने की इजाजत देने वाले फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने कहा यदि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश को ढंग से पढ़ लिया जाए तो पूरा विवाद ही खत्म हो जाए।

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New Delhi: दिल्ली के निजी स्कूलों (Private School Fee) को एनुअल फीस और डेवलपमेंट फीस वसूलने की इजाजत देने वाले फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने कहा यदि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश को ढंग से पढ़ लिया जाए तो पूरा विवाद ही खत्म हो जाए।

हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार, अभिभावक संघ, एनजीओ जस्टिस फॉर ऑल और निजी स्कूलों के संघ को निर्देश दिया कि वे अंतिम दलीलें हाईकोर्ट में दाखिल करें। अदालत अब इस पर 14 जुलाई को सुनवाई करेगी। अभिभावकों के साथ दिल्ली सरकार ने भी संबंधित फैसले को हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच के सामने चुनौती दी है।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ढंग से पढ़ लिया जाए तो पूरा विवाद ही खत्म हो जाए। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 31 मई को दिल्ली सरकार के डीओई की ओर से जारी अप्रैल और अगस्त 2020 के आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके जरिए एनुअल फीस और डेवलपमेंट फीस लेने पर रोक लगाई गई थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया था। कोरोना संकट के बीच लंबे समय से चले आ रहे फीस विवाद मामले में राजस्थान के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने मई के महीने में बड़ा फैसला सुनाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोनाकाल के शैक्षणिक सत्र 2020-2021 के लिए निजी स्कूलों को सालाना फीस में 15 फीसदी की छूट देने के लिए कहा था साथ ही यह भी कहा था कि स्कूल संचालक शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए पूरी फीस वसूलने के लिए स्वतंत्र हैं।