Ranchi News: झारखंड की विभिन्न जेलों में बंद उन विचाराधीन कैदियों (Under-trials) के लिए राहत की खबर है, जो अपनी संभावित सजा का आधा (1/2) या एक तिहाई (1/3) हिस्सा जेल की सलाखों के पीछे काट चुके हैं। स्टेन स्वामी एवं अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत ऐसे कैदियों की रिहाई के मामले को ‘राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड’ (State Sentence Review Board) के समक्ष रखने का निर्देश दिया है।
अदालत के पिछले आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार ने एक हलफनामा दायर कर राज्यभर की जेलों से ऐसे करीब 1000 कैदियों का पूरा ब्योरा अदालत को सौंपा है। इस सूची की सॉफ्ट कॉपी याचिकाकर्ता को सौंपी गई थी, जिस पर याचिकाकर्ता ने अपने सुझाव और लिखित जवाब कोर्ट में दाखिल किए हैं। अब अदालत ने इन सुझावों पर राज्य सरकार से उसका पक्ष मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।
सरकार द्वारा सौंपे गए आंकड़ों के अनुसार जिलों की जेलों की स्थिति:
- बिरसा मुंडा होटवार जेल (रांची): 199 कैदी
- चाईबासा जेल: 202 कैदी
- दुमका सेंट्रल जेल: 84 कैदी
- गुमला जेल: 77 कैदी
- खूंटी जेल: 53 कैदी
- लातेहार जेल: 43 कैदी
- मेदिनीनगर पलामू जेल: 32 कैदी
- गिरिडीह जेल: 31 कैदी
- घाटशिला जेल: 27 कैदी
- घाघीडीह जमशेदपुर जेल: 26 कैदी
- सरायकेला: 25 कैदी
- हजारीबाग सेंट्रल जेल: 24 कैदी
- लोहरदगा व धनबाद जेल: 23-23 कैदी
- सिमडेगा जेल: 20 कैदी
- पाकुड़ व राजमहल जेल: 14-14 कैदी
- रामगढ़ जेल: 11 कैदी
- देवघर, चास बोकारो व साहिबगंज जेल: 8-8 कैदी
- मधुपुर जेल: 7 कैदी
- तेनुघाट व गोड्डा जेल: 4-4 कैदी
- जामताड़ा, कोडरमा व साकची जेल: 2-2 कैदी
- हजारीबाग बरही जेल: 1 कैदी