Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने जन्मतिथि विवाद के चलते नौकरी से हटाई गई एक शिक्षिका को बड़ी राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सहायक शिक्षिका अबेदा खातून की बर्खास्तगी को पूरी तरह अवैध करार देते हुए विद्यालय प्रबंधन को उन्हें दो सप्ताह के भीतर सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने उनके वेतन निर्धारण और अन्य परिणामी लाभों का भुगतान करने का भी आदेश जारी किया है।
क्या है पूरा मामला? अबेदा खातून वर्ष २०१० से राईन उर्दू गर्ल्स मिडिल स्कूल में अंग्रेजी की सहायक शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं। उनके मैट्रिक के एडमिट कार्ड और मूल प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) में दर्ज जन्मतिथि अलग-अलग होने के कारण, स्कूल प्रबंधन ने १८ अप्रैल २०१९ को उनकी सेवा समाप्त कर दी थी। इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ शिक्षिका ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बिहार परीक्षा समिति की रिपोर्ट ने बदली बाजी सुनवाई के दौरान स्कूल प्रबंधन ने दलील दी कि उन्होंने इस विसंगति पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन समय पर जवाब न मिलने के कारण यह कदम उठाया गया। हालांकि, बाद में परीक्षा समिति ने अदालत को स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के मैट्रिक प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि ही उनके मूल रिकॉर्ड के अनुसार पूरी तरह सही और प्रमाणिक है।
प्राकृतिक न्याय का हुआ उल्लंघन: हाईकोर्ट जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि शिक्षिका को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना ही सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया गया, जो गलत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब परीक्षा बोर्ड ने मूल प्रमाणपत्र को ही सत्य माना है, तो केवल एडमिट कार्ड की भिन्न तिथि के आधार पर किसी को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया है कि मैट्रिक प्रमाणपत्र के आधार पर सर्विस बुक में सुधार किया जाए और राज्य सरकार १२ सप्ताह के भीतर नियमों के तहत वेतन व अन्य लाभ सुनिश्चित करे।