Ranchi News: हजारीबाग के बहुचर्चित वन भूमि घोटाले के आरोपी आईएएस अधिकारी विनय चौबे की जमानत याचिका पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने मामले में सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया, जबकि अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला हजारीबाग में सरकारी और वन भूमि के अवैध अधिग्रहण से जुड़ा है, जिसमें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने प्राथमिकी दर्ज की है। आईएएस विनय चौबे पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए सह-आरोपी विनय कुमार सिंह को सरकारी जमीन के अवैध म्यूटेशन और अधिग्रहण में अनुचित सहयोग प्रदान किया।
घोटाले के मुख्य बिंदु:
- अवैध खरीद: आरोप के अनुसार, विनय कुमार सिंह ने हजारीबाग में 28 डिसमिल ‘गैरमजरूआ खास’ और ‘जंगल-झाड़’ श्रेणी की सरकारी जमीन की अवैध तरीके से खरीद की थी।
- अधिकारियों की मिलीभगत: जांच में यह बात सामने आई कि अधिकारियों की कथित मिलीभगत से इस प्रतिबंधित जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) भी गलत तरीके से कर दिया गया।
- एसीबी की जांच: मामला प्रकाश में आने के बाद एसीबी ने आईएएस अधिकारी की भूमिका को संदिग्ध पाया और प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।

