Jharkhand High Court

HC News: बेटी की अंतरिम कस्टडी की मांग वाली पिता की याचिका खारिज, Family Court के आदेश पर HC का हस्तक्षेप से इन्कार

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By Devesh Ananad On 12 Oct, 2026
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HC News: (रांची) झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High court) ने बेटी की अंतरिम कस्टडी से जुड़े मामले में पति अंकित कुमार सिंह की याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने 9 अक्टूबर 2026 को यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि 15 मई 2026 के आदेश में संशोधन/स्पष्टीकरण की मांग वाली याचिका पुनर्विचार की तरह है, जो टिकाऊ नहीं है।

क्या है मामला

अंकित कुमार सिंह ने सीएमपी संख्या 994/2026 दायर कर प्रथम अपील (फाइलिंग) संख्या 2181/2026 में 15 मई 2026 को पारित आदेश में स्पष्टीकरण/संशोधन की मांग की थी। उस आदेश में हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी की अंतरिम कस्टडी मां मेघा सिंह को सौंपने और गार्जियनशिप मामले को जल्द निपटाने का निर्देश दिया था।

पति का कहना था कि आदेश के बाद पत्नी गार्जियनशिप केस संख्या 250/2025 में पेश नहीं हो रही है। साथ ही, यदि बच्ची की कस्टडी मुकदमे के लंबित रहने तक मां को दी गई है, तो रांची स्थित फैमिली कोर्ट की अधिकारिता पर सवाल उठता है, क्योंकि बच्ची का सामान्य निवास बदल सकता है।

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हाईकोर्ट ने क्या कहा

अदालत ने कहा कि पत्नी के पेश न होने का मुद्दा धारा 151 सीपीसी के तहत दायर याचिका में विचारणीय नहीं है। यदि कोई पक्षकार मुकदमे में उपस्थित नहीं होता, तो संबंधित अदालत कानून के अनुसार निर्णय ले सकती है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि 15 मई 2026 के आदेश में ही मुकदमे को शीघ्र निपटाने को कहा गया है और सुप्रीम कोर्ट ने उसमें हस्तक्षेप नहीं किया है, इसलिए अब विशेष समय-सीमा तय करना उचित नहीं होगा।

खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संवैधानिक अदालतों को सामान्य तौर पर अन्य अदालतों में लंबित मामलों के निपटारे के लिए समय-सीमा तय करने से बचना चाहिए। अदालत ने कहा कि अधिकारिता का मुद्दा भी अभी विचारणीय नहीं है, क्योंकि मामला रांची जजशिप की फैमिली कोर्ट में विचाराधीन है।

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पूर्व घटनाक्रम

पति-पत्नी की शादी 22 जनवरी 2017 को छपरा, बिहार में हुई थी। 18 जुलाई 2021 को बेटी का जन्म हुआ, जो जन्म से रांची में रह रही है। वैवाहिक विवाद के बाद पत्नी ने 20 सितंबर 2024 को नयागांव थाना कांड संख्या 184/2024 दर्ज कराया था, जिसे पटना हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (क्रिमिनल) 1731/2026 लंबित है।

पत्नी ने पहले चापड़ा की फैमिली कोर्ट में गार्जियनशिप केस 09/2024 दायर किया था, जो 5 मार्च 2025 को क्षेत्राधिकार के आधार पर खारिज हो गया। इसके बाद रांची की फैमिली कोर्ट में ओएस (गार्जियनशिप) 250/2025 दायर किया गया। 20 नवंबर 2025 को फैमिली कोर्ट ने मां को दो महीने में एक बार 2-3 घंटे के लिए बच्ची से मिलने की अनुमति दी थी। इसके खिलाफ प्रथम अपील दायर हुई, जिसमें 15 मई 2026 को हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर मां को अंतरिम कस्टडी दे दी थी।

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इस आदेश के खिलाफ पति सुप्रीम कोर्ट गया, जहां 29 मई 2026 को उसे स्पष्टीकरण मांगने की छूट दी गई। इसके बाद पति ने सीएमपी 597/2026 दायर की, जिसे 22 जून 2026 को वापस ले लिया गया। फिर उसी राहत के लिए सीएमपी 994/2026 दायर की गई, जिसे हाईकोर्ट ने बिना merit के खारिज कर दिया।

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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