Ranchi News: राज्य में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्मित पुल-पुलियों के लगातार ध्वस्त होने और इसके लिए जिम्मेदार भ्रष्ट अधिकारियों व एजेंसियों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने के मामले में हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने विभागीय सचिव द्वारा व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल नहीं किए जाने पर गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने अब ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को अगली सुनवाई तक एक विस्तृत जवाब दाखिल करने का अंतिम निर्देश दिया है।
कोर्ट की सख्त मौखिक टिप्पणी:
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद विभागीय सचिव ने खुद जवाब दाखिल न करके, मुख्य अभियंता (Chief Engineer) के माध्यम से शपथ पत्र दाखिल करवाया। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा:
“फरवरी के आदेश में सचिव को व्यक्तिगत रूप से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद मुख्य अभियंता द्वारा शपथ पत्र दाखिल करना सीधे तौर पर अदालत के आदेश की अवहेलना है, जो कि अवमानना का गंभीर मामला बनता है।”
अदालत ने सवाल किया कि क्या विभागीय सचिव को न्यायालय के आदेशों की जानकारी नहीं थी?
विभागीय सचिव से मांगे गए इन सवालों के जवाब:
हाईकोर्ट ने सचिव को निर्देश दिया है कि वे नए शपथ पत्र में स्पष्ट रूप से निम्नलिखित जानकारियां दें:
- ग्रामीण विकास विभाग द्वारा राज्य में बनाए गए कुल कितने पुल और पुलियां अब तक गिरे या क्षतिग्रस्त हुए हैं?
- इन हादसों के बाद किन-किन अधिकारियों या संवेदक एजेंसियों के खिलाफ विभागीय/कानूनी कार्रवाई शुरू की गई?
- दोषी पाए गए लोगों पर अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है?
यह जनहित याचिका पंकज कुमार यादव द्वारा दायर की गई है, जिसमें सरकारी धन के दुरुपयोग और घटिया निर्माण करने वालों पर कार्रवाई की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 जुलाई 2026 की तारीख तय की गई है।