Ranchi News:चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में कथित रूप से दूषित रक्त चढ़ाने के कारण HIV संक्रमित हुए पांच मासूम बच्चों के मामले में झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट के आदेश के आलोक में चाईबासा के उपायुक्त, एसपी और सिविल सर्जन वर्चुअली अदालत में उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि एक पीड़ित बच्चे के परिवार को उसके घर से निकाल दिया गया है, जिससे बच्चे की पढ़ाई प्रभावित हुई है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पीड़ित परिवारों को उनके घर के नजदीक अनुबंध के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनका जीवनयापन सुचारु रूप से चल सके। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि पीड़ित परिवारों को नियमित रूप से फूड पैकेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शादाब अंसारी ने पक्ष रखा।
मामले में प्रार्थी दीपिका हेंब्रम एवं अन्य द्वारा दायर याचिका में मांग की गई है कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 1 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए और उन्हें जीवनभर मुफ्त एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। याचिका के अनुसार, 5 से 7 वर्ष आयु वर्ग के ये बच्चे अक्टूबर 2025 में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान कथित लापरवाही के कारण HIV से संक्रमित हो गए। सभी बच्चे पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले के अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अत्यंत गरीब परिवारों से आते हैं, जिनका जीवनयापन दैनिक मजदूरी पर निर्भर है। याचिका में बच्चों के लिए सुरक्षित रक्त चढ़ाने, एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART), नियमित CD4 और वायरल लोड जांच, पोषण सहायता और मनोसामाजिक काउंसलिंग की व्यवस्था की मांग की गई है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए पक्का मकान और एक विशेष मेडिकल बोर्ड के गठन की भी मांग उठाई गई है। मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार को विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।