Ranchi News: रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार जेल) में एक महिला बंदी के गर्भवती होने और उसके कथित यौन शोषण के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जवाब पर असंतोष व्यक्त किया है। सोमवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट तथा न्यायिक जांच रिपोर्ट तलब करते हुए पूछा कि इतने संवेदनशील मामले में अब तक मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष क्यों प्रस्तुत नहीं की गई। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से डीजीपी और आईजी (जेल) का शपथ-पत्र दाखिल किया गया, जिसे कोर्ट ने नाकाफी माना। अदालत ने मौखिक टिप्पणी की कि डीजीपी इस मामले को केवल जेल प्रशासन का विषय बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि जैसे ही यह गंभीर मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आया, संबंधित महिला बंदी को तुरंत जमानत कैसे मिल गई? हालांकि, सरकार की ओर से पैरवी करते हुए बताया गया कि तीन सदस्यीय जांच समिति ने तीन दिनों में जांच पूरी कर सीलबंद रिपोर्ट सौंपी है, जिसके अनुसार यौन उत्पीड़न की घटना नहीं हुई है और यह महज एक अफवाह है। सरकार के अनुसार महिला बंदी ने भी लिखित बयान दिया है कि उसके साथ कुछ गलत नहीं हुआ। लेकिन कोर्ट ने वास्तविक स्थिति जानने के लिए रांची के न्यायायुक्त से न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट दोनों को पेश करने का आदेश दिया है। बता दें कि यह मामला नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा उठाए जाने और मीडिया में आने के बाद ‘झालसा’ की टीम ने भी जेल जाकर बयान दर्ज किए थे।