Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने 10 साल पुराने मामले के एक महत्वपूर्ण फैसले में पति को निर्देश दिया है कि वह अपनी अलग रह रही पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता (Permanent Alimony) के रूप में 20 लाख रुपये का भुगतान करे। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने ‘R देवी बनाम M कुमार’ (First Appeal ) के मामले में सुनवाई करते हुए जमशेदपुर फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को स्थायी गुजारा भत्ता के संशोधन के साथ बरकरार रखा है। अदालत ने आदेश दिया कि पति 20 लाख रुपये की राशि को 12 महीनों के भीतर चार समान किस्तों में चुकाएगा, जिसकी पहली किस्त दो महीने के भीतर देनी होगी।
क्या है पूरा मामला? मामले के अनुसार, M कुमार और R देवी का विवाह 23 फरवरी 2003 को जमशेदपुर में हुआ था। बाद में दोनों के बीच विवाद बढ़ने पर पति ने जमशेदपुर के फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की। फैमिली कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर 22 अप्रैल 2016 को पति के पक्ष में तलाक की डिक्री मंजूर कर दी थी। इस फैसले के खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
अदालत की सुनवाई और दूसरी शादी का मामला हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पति ने तलाक की डिक्री मिलने के बाद वर्ष 2018 में दूसरी शादी कर ली है। इस परिस्थिति को देखते हुए पत्नी के वकील ने कहा कि अब पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं बची है, इसलिए मामले को केवल स्थायी गुजारा भत्ता (Alimony) तय करके सुलझाया जाए।
वेतन और स्थायी गुजारा भत्ता का निर्धारण अदालत के निर्देश पर टाटा मोटर्स (पति के नियोक्ता) और पति द्वारा दाखिल शपथपत्र के अनुसार, जुलाई 2026 में उसका कुल वेतन लगभग ₹47,498 तथा टेक-होम वेतन ₹34,372 दर्ज किया गया। हाईकोर्ट ने माना कि पत्नी (उम्र लगभग 47 वर्ष) के पास आजीविका का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है। कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न दिशा-निर्देशों (जैसे ‘कल्याण डे चौधरी’ और ‘रजनीश बनाम नेहा’ केस) का हवाला देते हुए कहा कि जीवन प्रत्याशा और भविष्य की महंगाई को ध्यान में रखकर गुजारा भत्ता तय करना आवश्यक है।

