Ranchi News: “तीन दिन योग करलिओ, दिमाग कर तनाव हट गेलव बाबू” — बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार) के एक बंदी के ये अनमोल बोल दर्शाते हैं कि योग किस तरह सलाखों के पीछे बंद कैदियों के जीवन से मानसिक तनाव को दूर कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची के तत्वावधान में एक अनूठी और ऐतिहासिक पहल की गई। माननीय झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष (झालसा) सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देशों पर राज्य भर के 99 केंद्रों से लगभग 25,000 लोगों ने वर्चुअल माध्यम (गूगल मीट) से सामूहिक योगाभ्यास किया। इसमें राज्य की विभिन्न जेलों में बंद हजारों विचाराधीन कैदियों के साथ-साथ वृद्धाश्रम, प्रोबेशन होम और शेल्टर होम के आवासियों ने भी ऑनलाइन जुड़कर योग को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास: रंजना अस्थाना

रांची व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित 40 कोर्ट्स बिल्डिंग के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य संबोधन देते हुए झालसा की सदस्य सचिव, सुश्री कुमारी रंजना अस्थाना ने कहा:
“स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन और मस्तिष्क का विकास संभव है। प्राचीन काल से चली आ रही योग पद्धति भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसे हर व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।”
वहीं, माननीय न्यायायुक्त-सह-अध्यक्ष (डालसा) श्री अनिल कुमार मिश्रा-1 ने नित्य योग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि नियमित योगाभ्यास से न केवल कई बीमारियों से बचाव संभव है, बल्कि इससे व्यक्ति मानसिक रूप से भी बेहद सशक्त बनता है।
डालसा और ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ का अनूठा समन्वय

यह पूरा कार्यक्रम डालसा और ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुआ। मंच का संचालन डालसा सचिव राकेश रोशन द्वारा किया गया। कार्यक्रम में झालसा के डिप्टी सेक्रेटरी अभिषेक कुमर और उनकी टीम मौजूद थी। मुख्य कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षक एवं मध्यस्थ श्री पंचानन सिंह ने उपस्थित लोगों को योग की विभिन्न मुद्राओं, आसनों और प्राणायाम का गहन अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि इस संस्था द्वारा राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर योगाभ्यास कराया जा रहा है। इस गरिमामयी अवसर पर कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश, व्यवहार न्यायालय के सभी अपर न्यायायुक्त, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, अधिवक्तागण, मध्यस्थ, न्यायालयकर्मी और मीडियाकर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।