Ranchi News: वाहन रिलीज से जुड़े मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने डोरंडा थाना पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और अधिवक्ता की जब्त कार तत्काल छोड़ने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने डोरंडा थाना प्रभारी को निर्देश दिया कि गुरुवार शाम 4:30 बजे तक सभी औपचारिकताएं पूरी कर कार रिलीज करें। प्रार्थी को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, बीमा और ड्राइविंग लाइसेंस के साथ थाना पहुंचने को कहा गया। साथ ही रांची एसपी को आदेश के अनुपालन की निगरानी करने का निर्देश दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद डोरंडा थानेदार ने जब्त कार को गुरुवार को नहीं छोड़ी। अधिवक्ता मनोज टंडन शाम करीब छह बजे तक सभी कागजात लेकर आईओ और थानेदार का आने का इंतजार करते रहे। लेकिन घंटों इंतजार के बावजूद कोई पुलिस अधिकारी नहीं पहुंचा। जब जाने लगे तो थानेदार ने उनसे गाड़ी रिलीज का कागजात लेने को कहा। इस पर उन्होंने कागजात पुलिस को सौंपते हुए वहां से निकले।
जबकि हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद वाहन नहीं छोड़ना उचित नहीं है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि क्या किसी मामूली सड़क दुर्घटना में केवल इस आधार पर वाहन छोड़ने से इनकार किया जा सकता है कि प्रार्थी हाईकोर्ट के अधिवक्ता हैं। अदालत ने पाया कि दुर्घटना में किसी के घायल होने का आरोप नहीं है और ट्रायल कोर्ट का रिहाई आदेश न तो निरस्त हुआ है और न ही उस पर कोई रोक लगी है। ऐसे में वाहन जब्त रखने का कोई औचित्य नहीं बनता। अदालत ने थाना प्रभारी से यह भी पूछा है कि 21 फरवरी के न्यायिक आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया। इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा गया है। यह आदेश अधिवक्ता मनोज टंडन की याचिका पर पारित किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ऋतु कुमार ने दलील दी कि 17 फरवरी की घटना में कोई घायल नहीं हुआ और संबंधित मजिस्ट्रेट पहले ही 21 फरवरी को वाहन रिहाई का आदेश दे चुके हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सुरेंद्रभाई अंबालाल देसाई बनाम गुजरात मामले का हवाला देते हुए कहा कि वाहनों को पुलिस थाने में सड़ने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि इससे मामले में अनावश्यक देरी होगी।