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‘कोवैक्सीन’ का बच्चों पर परीक्षण रोकने की मांग वाली याचिका पर केन्द्र से जवाब तलब

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 19 May, 2021
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New Delhi: दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) द्वारा ‘भारत बायोटेक’ को कोविड-19 रोधी टीके ‘कोवैक्सीन’ के दो से 18 वर्ष के बच्चों पर परीक्षण के लिए दी गई अनुमति रद करने के लिए दाखिल याचिका पर बुधवार को केन्द्र को नोटिस जारी किया।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने स्वास्थ्य मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और ‘भारत बायोटेक’ को नोटिस जारी किया है। इन सभी को 15 जुलाई तक नोटिस का जवाब देना हैं। यह याचिका संजीव कुमार ने दायर की गई है।

अदालत ने हालांकि कोविड-19 रोधी टीके ‘कोवैक्सीन’ के दो से 18 वर्ष के बच्चों पर ‘क्लीनिकल ट्रायल’ के लिए 12 मई को दी गई अनुमति पर कोई भी अंतरिम आदेश पारित करने से इन्कार कर दिया। ‘क्लीनिकल ट्रायल’ 525 स्वस्थ स्वयंसेवकों पर किया जाएगा। इन्हें भी टीके 28 दिन के अंतर में दो खुराक में लगाए जाएंगे।

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‘कोवैक्सीन’ का विकास हैदराबाद आधारित भारत बायोटेक और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने किया है। यह उन दो टीकों में शामिल है, जिन्हें भारत में अभी व्यस्कों को लगाया जा रहा है। संजीव कुमार ने अपनी याचिका में संदेह व्यक्त किया है कि ट्रायल में हिस्सा लेने वाले बच्चों को टीका लगने से उनके स्वास्थ्य या मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

यह भी दावा किया था कि ट्रायल में हिस्सा लेने वाले बच्चों को स्वयंसेवक नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वे ट्रायल से उन पर पड़ने वाले परिणाम को समझने के सक्षम नहीं है। याचिका में कहा गया कि स्वस्थ बच्चों पर यह परीक्षण करना ‘‘हत्या’’ के बराबर है। इसमें इस तरह के परीक्षणों में शामिल लोगों या इसे संचालित करने के लिए अधिकृत लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की गई है।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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