Ranchi News: भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB), रांची की विशेष अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी राजेंद्र प्रसाद जायसवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने जब्त किए गए अपने दो मोबाइल फोन और चार सिम कार्डों को वापस करने की गुहार लगाई थी। विशेष न्यायाधीश ओंकार नाथ चौधरी की अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और डिजिटल साक्ष्यों के महत्व को देखते हुए आरोपी को इन नंबरों के डुप्लिकेट सिम कार्ड निकालने की अनुमति देने से भी साफ इनकार कर दिया।
व्यापार और बैंकिंग का दिया था हवाला विजिलेंस (विशेष) केस संख्या 09/2025 के आरोपी राजेंद्र प्रसाद जायसवाल (जो वर्तमान में जमानत पर हैं) की ओर से अधिवक्ता कुंदन कुमार वर्मा ने दलील दी थी कि जब्त किए गए आईफोन एक्सआर (iPhone XR) और वीवो वी27 (Vivo V27) मोबाइल फोन तथा उनके चार सिम कार्ड (9993096424, 9617775408, 9993808808, 8120100656) उनके व्यवसाय और बैंकिंग कार्यों के लिए बेहद जरूरी हैं। जीएसटी रिटर्न, इनकम टैक्स फाइलिंग और आधार ओटीपी के लिए ये नंबर आवश्यक हैं, इसलिए इन्हें डेटा बैकअप लेकर रिलीज कर दिया जाए।
एसीबी ने जताई सबूत मिटने की आशंका वहीं, एसीबी की ओर से विशेष लोक अभियोजक (Spl. P.P.) आलोक कुमार ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि ये मोबाइल और सिम कार्ड वित्तीय लेनदेन तथा आपराधिक साजिश से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हैं। इन उपकरणों को डेटा विश्लेषण के लिए डिजिटल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (DFSL), होटवार भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। इस चरण में इन्हें रिलीज करने या डुप्लिकेट सिम जारी करने से डिजिटल सबूतों और मनी ट्रेल के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट किए जाने की पूरी आशंका है।
अदालत का फैसला अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि मामले की जांच अभी जारी है और चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है। हाई-स्टेक वाले इस मामले में मोबाइल और सिम कार्ड में मौजूद डेटा बेहद कीमती साक्ष्य हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मोड़ पर आरोपी को राहत देना उचित नहीं होगा और इसी के साथ कोर्ट ने रिलीज याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।