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कथित फर्जी मुठभेड़ में सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट की गिरफ्तारी पर लगी रोक

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 20 Oct, 2020
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रांची। झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में कथित फर्जी मुठभेड़ मामले से जुड़े सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट की क्वैसिंग याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने सहायक कमांडेंट शंभु कुमार विश्वास को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इसको लेकर सहायक कमांडेंट शंभु कुमार विश्वास ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर प्राथमिकी को चुनौती दी है।

चाईबासा के छोटा नगरा थाना क्षेत्र के सांरडा जंगल में सीआरपीएफ ने कांबिंग ऑपरेशन चलाया था। इसमें सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और एसपी सहित पुलिस भी शामिल हुई थी। मुठभेड़ में मंगल होनहांगा को गोली लगी और उसकी मौत हो गई। इसको लेकर सीआरपीएफ की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, लेकिन बाद इस मामले की जांच सीआईडी ने की। मामला कथित फर्जी मुठभेड़ का पाए जाने के बाद सहायक कमांडेंट के खिलाफ वर्ष 2012 प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

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इस मामले में सीआईडी सहायक कमांटेंड को कई बार बयान दर्ज करने के लिए बुलाया, लेकिन वे नहीं आए तो हाल ही में सीआइडी ने निचली अदालत से शंभु कुमार विश्वास के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कराया। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विनोद सिंह ने अदालत को बताया कि सीआईडी की ओर से दर्ज प्राथमिकी गलत है और दुर्भावना से ग्रसित है। इस मामले की सीआरपीएफ ने अपने स्तर से जांच कराई थी, जिसमें सहायक कमांडेंट को क्लीनचिट मिली है।

पुलिस जांच में कई गवाहों ने नक्सली मुठभेड़ की घटना को सही बताया है। लेकिन सोनवा के तत्कालीन थाना प्रभारी के बयान पर इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है। उक्त थाना प्रभारी पहले इस ऑपरेशन में जाना नहीं चाहता था, लेकिन जब दबाव दिया गया तो वहऑपरेशन में शामिल हुआ था। सुनवाई के बाद अदालत ने सहायक कमांडेंट शंभु कुमार विश्वास के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।  

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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