हाईकोर्ट ने कैट का आदेश किया निरस्त, कहा- सिविल इंजीनियरिंग की अनिवार्य योग्यता अनुभव के आधार पर पूरी नहीं की जा सकती
Ranchi News: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और तकनीकी संवर्ग के एक वरिष्ठ अधिकारी के बीच चल रहे लंबे कानूनी विवाद में झारखण्ड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) ने एक कड़ा और अहम फैसला Friday को सुनाया है। मुख्य न्यायमूर्ति श्री एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति श्री राजेश शंकर की खंडपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), पटना (रांची सर्किट बेंच) के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें आरोपी की डिमोशन रद्द कर दी गई थी। इसके साथ ही NHAI द्वारा जारी डिमोशन (मूल पद पर वापसी) के मेमोरेंडम को पूरी तरह बहाल कर दिया गया है।
क्या था पूरा मामला? प्रतिवादी पूर्ण चंद्र कहिली ने वर्ष 1997 में NHAI में ड्राफ्ट्समैन (जिसे बाद में ‘टेक्निकल असिस्टेंट’ कहा गया) के रूप में नौकरी शुरू की थी। नौकरी के दौरान उन्होंने जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ से डिस्टेंस एजुकेशन मोड के जरिए सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की। इसी डिग्री के आधार पर उन्होंने वर्ष 2011 में मैनेजर (टेक्निकल) के पद के लिए आवेदन किया और बाद में पदोन्नत होकर डिप्टी जनरल मैनेजर (टेक्निकल) के पद तक पहुंचे।
चर्चित मामले ‘ओडिशा लिफ्ट इरिगेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम रबी शंकर पाट्रो (2018)’ में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट निर्देश दिया था कि डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से डीम्ड यूनिवर्सिटी से प्राप्त इंजीनियरिंग डिग्रियां रद्द की जाती हैं और ऐसी डिग्रियों के आधार पर पाए गए सभी प्रमोशन या करियर लाभ भी वापस लिए जाएंगे। इसी निर्देश के अनुपालन में NHAI ने 27 जून 2024 को कहिली को डिप्टी जनरल मैनेजर के पद से डिमोट कर वापस उनके मूल पद ‘टेक्निकल असिस्टेंट’ पर भेज दिया था। इसके खिलाफ CAT ने उनके पक्ष में फैसला दिया था, जिसे NHAI ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट की खंडपीठ की मुख्य टिप्पणियां: अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि CAT ने पिछले फैसलों और नियमों की गलत व्याख्या की है। सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री इस उच्च तकनीकी पद के लिए एक अनिवार्य योग्यता है। अदालत ने यह भी दो टूक कहा कि केवल लंबे समय तक कार्य करने का अनुभव, आवश्यक शैक्षणिक योग्यता की जगह नहीं ले सकता। मध्य प्रदेश राज्य बनाम धरम वीर मामले के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि नियमों के विरुद्ध जाकर सहानुभूति के आधार पर अयोग्य व्यक्ति को उच्च पद पर बनाए रखना विधिसम्मत नहीं है।
हाईकोर्ट ने अंतिम रूप से CAT के 06 फरवरी 2025 के आदेश को रद्द करते हुए NHAI के उस आदेश को सही ठहराया, जिसके तहत पूर्ण चंद्र कहिली को डिप्टी जनरल मैनेजर के पद से वापस टेक्निकल असिस्टेंट के पद पर डिमोट किया गया था।

