Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कांटाटोली चौक स्थित बहुचर्चित भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश के खिलाफ दायर शबाना खातून की रिट याचिका (W.P.(C) No. 2328 of 2014) को खारिज कर दिया है, जिसमें पब्लिक उर्दू मिडिल स्कूल की ओर से दाखिल हस्तक्षेप याचिका (Intervention Petition) को स्वीकार किया गया था।
क्या था पूरा विवाद और हाईकोर्ट की मुख्य बातें:
भूमि का स्वामित्व और वाद: याचिकाकर्ता शबाना खातून ने रांची के लोअर बाजार थाना अंतर्गत कांटाटोली चौक (टमटम टोली) स्थित एमएस प्लॉट संख्या 375, होल्डिंग संख्या 218 की जमीन को रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए खरीदने का दावा करते हुए अपने अधिकार और हक की घोषणा के लिए टाइटल सूट (T.S. No. 173 of 2011) दायर किया था।
हस्तक्षेप याचिका (Intervention Petition): मुकदमे के दौरान पब्लिक उर्दू मिडिल स्कूल के अध्यक्ष मो. साबिर (प्रतिवादी संख्या 4) ने एक हस्तक्षेप याचिका दायर की। उनका तर्क था कि विवादित भूमि रांची नगर निगम की खतियानी जमीन है और वहां स्कूल संचालित होता है। निचली अदालत (सबऑर्डिनेट जज-I, रांची) ने 24 फरवरी 2014 को इस हस्तक्षेप याचिका को स्वीकार कर लिया था, जिसके खिलाफ यह रिट याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का हवाला: हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध फैसले (Vidur Impex and Traders (P) Ltd. vs. Tosh Apartments (P) Ltd.) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यदि किसी तीसरे पक्ष के पास विवादित संपत्ति से जुड़े प्रासंगिक दस्तावेज हैं और मामले के पूर्ण व प्रभावी न्यायसंगत निस्तारण के लिए उसकी उपस्थिति आवश्यक है, तो उसे उचित पक्षकार (Proper Party) माना जा सकता है।
अदालत का निष्कर्ष: हाईकोर्ट ने पाया कि चूंकि रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और नगर निगम की रिपोर्ट से जमीन के एक हिस्से पर स्कूल के संचालन और स्वामित्व को लेकर संशय व विवाद की स्थिति बनी हुई है, इसलिए ट्रायल कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप याचिका स्वीकार करने में कोई कानूनी त्रुटि या अवैधता नहीं की गई है।
अदालत का आदेश:
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की रिट याचिका को खारिज कर दिया है और पूर्व में दिए गए अंतरिम आदेश (Interim Order) को भी वापस ले लिया है। साथ ही, दोनों पक्षों को संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही में सहयोग करने की स्वतंत्रता दी है।

