Ranchi News: रांची। जेपीएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और परीक्षा परिणाम में हेरफेर से जुड़े सीआईडी कांड संख्या 16/2026 में आरोपी अभय कुमार तिवारी को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर न्यायायुक्त-1 योगेश कुमार की अदालत ने बुधवार को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अभय तिवारी 22 जुलाई 2026 से न्यायिक हिरासत में है।
सीआईडी ने अदालत में आरोप लगाया कि अभय तिवारी टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर रहते हुए परीक्षा घोटाले में मध्यस्थ और सुविधा देने वाले की भूमिका में था। जांच के दौरान उसके टीडीपीएल कर्मियों, जेपीएससी से जुड़े लोगों और अभ्यर्थियों से संपर्क तथा बैंक खाते में हुए वित्तीय लेन-देन का उल्लेख केस डायरी में किया गया है। सीआईडी के अनुसार, टीडीपीएल निदेशकों के रांची प्रवास के दौरान होटल खर्च का भुगतान भी अभय के बैंक खाते से यूपीआई के जरिए किया गया था।
अदालत ने कहा कि आरोप केवल टीडीपीएल से उसके जुड़ाव या मार्केटिंग मैनेजर होने पर आधारित नहीं हैं। जांच में उसके खिलाफ परीक्षा प्रक्रिया में कथित हेरफेर में भूमिका निभाने से संबंधित प्रथमदृष्टया पर्याप्त सामग्री मिली है। अदालत ने यह भी कहा कि झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 की धारा 22(बी) के तहत जमानत के लिए दोहरी शर्त पूरी करनी होती है। आरोपी को यह संतुष्ट करना होता है कि उसके दोषी नहीं होने के उचित आधार हैं और जमानत पर रहते हुए वह दोबारा अपराध नहीं करेगा। अदालत ने माना कि अभय इन वैधानिक शर्तों को पूरा करने में विफल रहा। इसके बाद उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
1. 22 जुलाई से जेल में है अभय
अभय कुमार तिवारी को 22 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में है। जमानत के लिए उसने एजेसी-1 योगेश कुमार की अदालत में एमसीए 1726/2026 दाखिल किया था।
2. कोर्ट ने कहा- मामला सिर्फ TDPL में नौकरी का नहीं
अदालत ने साफ कहा कि अभय के खिलाफ आरोप केवल इस आधार पर नहीं हैं कि वह TDPL का मार्केटिंग मैनेजर था। केस डायरी में उसे TDPL, जेपीएससी से जुड़े लोगों और अभ्यर्थियों के बीच कथित मध्यस्थ/सुविधादाता के रूप में जोड़ने वाली सामग्री है।
3. रांची में TDPL का कार्यालय खुलवाने में भूमिका
सीआईडी ने रेखा देवी के बयान का हवाला दिया। इसके अनुसार अभय ने लालपुर में अधिकारियों के रहने के लिए मकान लीज पर लेने और रांची में TDPL का स्थानीय कार्यालय चलाने में भूमिका निभाई। लीज एग्रीमेंट उसके बहनोई सौरभ कुमार पांडेय के नाम से कराया गया। उसी परिसर से अभय के नाम का TDPL आई-कार्ड बरामद होने की बात कही गई।
4. TDPL निदेशकों के होटल खर्च का भुगतान
सीआईडी के अनुसार TDPL के निदेशकों के रांची के रेडिसन ब्लू में ठहरने का खर्च अभय ने अपने बैंक खाते से यूपीआई के जरिए चुकाया। अदालत ने इस वित्तीय संबंध को भी केस डायरी की सामग्री का हिस्सा माना।
5. 24 अभ्यर्थियों की सेटिंग का आरोप
सह आरोपी बुधेश्वर भगत के कथित बयान के अनुसार 24 अभ्यर्थियों के नाम अभय तक पहुंचाए गए थे। इनमें से 11 अभ्यर्थियों के 14वीं जेपीएससी पीटी में सफल होने का दावा जांच में किया गया है। सीआईडी ने यह भी आरोप लगाया कि इन अभ्यर्थियों से बड़ी रकम ली गई।
6. परीक्षा में खुद सफल होने का भी मुद्दा
आदेश में जांच के उस आरोप का उल्लेख है कि अभय TDPL का मार्केटिंग मैनेजर होते हुए उसी कंपनी द्वारा कराई जा रही परीक्षाओं में खुद भी शामिल हुआ और कई परीक्षाओं में सफल हुआ। इनमें PGTTCE-2023, JSSC-CGL-2023, ACF PT-2024, FRO PT-2024 और FSO Written Exam-2023 शामिल हैं।
9 सितंबर के आसपास प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी अदालत के पूर्व आदेश में टाइपिंग त्रुटि सुधारने का उल्लेख है और FRO तथा ACF परीक्षाओं में अभय के शामिल होने को गंभीर हित-संघर्ष बताया गया है।
7. OMR में हेरफेर का आरोप
सीआईडी ने शिकायत के हवाले से आरोप लगाया कि TDPL और अभय से जुड़े लोगों ने FRO परीक्षा की 350 से अधिक और ACF परीक्षा की 150 से अधिक OMR शीट में कथित तौर पर हेरफेर किया। साथ ही अभ्यर्थियों से मूल प्रमाणपत्र, रद्द चेक और हस्ताक्षरित खाली कागजात लेने का आरोप भी है।
लेकिन ध्यान रहे: ये जांच एजेंसी/शिकायत में लगाए गए आरोप हैं, अदालत ने इन्हें अंतिम रूप से सिद्ध नहीं माना है।
8. जमानत क्यों खारिज हुई?
यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालत ने झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 की धारा 22(बी) का उल्लेख करते हुए कहा कि अभियोजन जमानत का विरोध करे तो आरोपी को दोहरी कसौटी पूरी करनी होगी।
अदालत को संतुष्ट होना चाहिए कि:
- आरोपी के दोषी नहीं होने के उचित आधार हैं और
- जमानत पर रहते हुए उसके दोबारा अपराध करने की संभावना नहीं है।
अदालत ने माना कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर वह यह संतुष्टि दर्ज नहीं कर सकती कि अभय के दोषी नहीं होने के उचित आधार मौजूद हैं। इसलिए पहली वैधानिक शर्त ही पूरी नहीं हुई।
9. कोर्ट की सबसे अहम टिप्पणी
अदालत ने अभय के खिलाफ बैंक लेन-देन, TDPL से संबंध, निदेशकों के खर्च का भुगतान, अभ्यर्थियों से संपर्क और जांच में दर्ज बयानों को एक साथ देखते हुए कहा कि उसके खिलाफ परीक्षा में कथित हेरफेर में शामिल होने की प्रथमदृष्टया पर्याप्त सामग्री है।

