Ranchi News: सोन नदी के किनारे नाव बांधने को लेकर हुए विवाद में कैलाश चौधरी की हत्या के करीब 17 साल पुराने मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने चार दोषियों की सजा बरकरार रखी है। न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने रामबृक्ष चौधरी, लखन चौधरी, रमेश चौधरी और रामाशीष चौधरी की आपराधिक अपील खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत से मिली सजा को सही ठहराते हुए चारों को दो महीने के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।
मामला 17 सितंबर 2000 का है। अभियोजन के अनुसार सोन नदी के किनारे दिलीप चौधरी नाव बांध रहे थे। इसी बात को लेकर दीपान चौधरी और उसके बेटों के साथ विवाद हुआ। आरोप है कि आरोपियों ने दिलीप, उसके पिता कैलाश, भाई उदय और मां शांति देवी के साथ लाठी-डंडे से मारपीट की। गंभीर चोट लगने के बाद कैलाश चौधरी को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
ट्रायल कोर्ट ने 22 अप्रैल 2009 को चारों को दोषी करार दिया था और 28 अप्रैल को सजा सुनाई थी। उन्हें धारा 147 के तहत दो वर्ष, धारा 323 में एक वर्ष, धारा 307 में पांच वर्ष तथा धारा 304 पार्ट-1/149 के तहत सात वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई थी। सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश था।
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शी और घायलों की गवाही को चिकित्सकीय साक्ष्य का पर्याप्त समर्थन मिलता है। मृतक के पोस्टमार्टम में सिर समेत शरीर पर चोट के निशान मिले थे और डॉक्टर ने चोटों से शॉक व अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मौत की पुष्टि की थी। घायल उदय चौधरी के सिर में भी फ्रैक्चर मिला था।
अदालत ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी की गवाही नहीं होने मात्र से अभियोजन का मामला कमजोर नहीं हो जाता। उपलब्ध मौखिक और चिकित्सकीय साक्ष्य से आरोपियों की घटना में भागीदारी संदेह से परे साबित होती है। चारों दोषी फिलहाल जमानत पर थे। हाईकोर्ट ने उनके जमानत बांड रद्द करते हुए दो महीने में आत्मसमर्पण का निर्देश दिया है। आदेश का पालन नहीं करने पर ट्रायल कोर्ट को गिरफ्तारी और शेष सजा भुगतने के लिए हिरासत में लेने की कार्रवाई करने को कहा गया है।

