Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में वर्षों से लंबित प्रारंभिक जांच (पीई) के मामलों पर गंभीर रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को एसीबी में लंबित सभी प्रारंभिक जांचों की वर्तमान एवं अद्यतन स्थिति की रिपोर्ट तैयार कर सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित की गई है। एसीबी में प्रारंभिक जांच के मामलों के शीघ्र निष्पादन को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कई प्रारंभिक जांच 11 वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। कुछ मामले वर्ष 2013 से लंबित हैं, जबकि कई मामलों में वर्ष 2022 से अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि प्रारंभिक जांच अनिश्चितकाल तक लंबित रहने से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई कर्मचारी जांच पूरी होने से पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनके विरुद्ध शुरू की गई प्रारंभिक जांच आज तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। खंडपीठ ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को एसीबी की सभी लंबित प्रारंभिक जांचों का अद्यतन ब्योरा सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि एसीबी में वर्षों से लंबित पीई के मामलों और उनके समय पर निष्पादन नहीं होने के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की थी। अब अदालत लंबित मामलों की वास्तविक स्थिति और उनके निष्पादन की प्रगति की निगरानी कर रही है।